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    Thursday, December 23, 2010

    अजब ब्लॉगजगत की गजब कहानी भाग -२ टिप्पणी ब्लोगर समूह

    ajab[10] अजब ब्लॉगजगत की गजब कहानी  पे  मैं जो भी पोस्ट करता हूँ उसका मकसद नए ब्लोगर को सही राह दिखाना होता है. मैं जब नया था तो मैंने बहुत सी बातें परेशान हो के सीखी और मैं चाहता यही हूँ की आने वाले  नए ब्लोगर को उन परेशानियो का सामना ना करना पड़े जो मैंने की.
    आज कल बड़ा शोर  मचा है ब्लोगवाणी शुरू करो, चिठाजगत का क्या हुआ, इत्यादि इत्यादि. बहुत से लोग नया अग्रीगेटर बनाने मैं लगे हैं तो कोई पुराना माल खरीदने की फिराक मैं है.  सत्य तो यह है हिंदी अग्रीगेटर की सबसे अधिक आवश्यकता नए ब्लोगर को होती है या उनको जो एक सीमित ब्लोगर समूह के बाहर जा के कुछ नया और अच्छा पढना चाहते हैं. लेकिन आश्चर्य की बात यह है की ना जाने क्यों शोर मचा रहे हैं पुराने ब्लोगर?



    जब मैं नया नया था तो मुझे भी ब्लोगवाणी का सहारा लेना पड़ा था. लेकिन ब्लोगवाणी से अधिक सहारा खुद की पहचान बनाने  मैं मिला था दूसरों के ब्लॉग पे जाकर टिप्पणी करने से. अब तो केवल
    हमारीवाणी  का सहारा बचा है. अमन का पैग़ाम से अक्सर वो भी नाराज़ दिखा करता है..
    आप कितना भी अच्छा लिखते हों , कितना भी सच्चा पैग़ाम देते हों , टिप्पणी यदि  नहीं करते दूसरे ब्लोगर की पोस्ट पे जाकर तो याद रखें आप के ब्लॉग को देखने भी कोई नहीं आएगा. और वैसे भी पूरी पोस्ट केवल ५% ब्लोगर ही पढ़ा करते हैं. यदि यह आदत आपने बना ली तो फिर आप को  इस बात का लाइसेन्स मिल जाता है की आप अब कुछ भी लिख सकते हैं. ५०-७० टिप्पणी अवश्य मिल जाएगी.


    मान लें  आपकी किसी पोस्ट पे ४0-४२ टिप्पणी आ गयी तो अब आपके  लिए यह आवश्यक हो जाता है  की आप  उन सब के ब्लॉग पे  जा कर  टिप्पणी करें . और  ऐसा करने के लिए कम से कम २ दिन चाहिए.  यदि ऐसा नहीं किया तो आपकी  ही अगली पोस्ट पे १२-२० से अधिक टिप्पणी नहीं मिलेगी. सारा समय तो टिप्पणी करने मैं ही निकल जाता है  अब भाई ऐसे मैं  अच्छी ब्लॉग पोस्ट पढने ,नए ब्लोगर की तलाश और अच्छा लिखने वालों का उत्साह बढ़ाने  का समय कहां से निकला जाए ?अब ब्लोगिंग फुल टाइम नौकरी तो है नहीं. इसी कारणवश ब्लोगर अक्सर ५०-६०  के समूह मैं बंध के रह जाता है.


    यह इस ब्लॉगजगत की एक बहुत बड़ी कमी है. 

    जब समूह की बात आ गयी है तो यह भी कहता चलूँ यहाँ इन ५०-६० "ब्लोगर टिप्पणी समूह" मैं भी कई छोटे और बड़े समूह मोजूद हैं. इनमें से कुछ समूह पैसे वालों के हैं, कुछ धर्म के नाम पे हैं, कुछ शहर के अनुसार बंट गए हैं. वैसे समूह मैं रहना या काम करना बुरा नहीं लेकिन दूसरे समूह वालों का भला ना चाहना या उनके ब्लॉग पे समूह बना के ना जाना और उनकी अच्छी पोस्ट पे भी टिप्पणी ना करना अवश्य ग़लत है. केवल आपसी संबंधों को ध्यान मैं रखते हुए , एक दूसरे  के ब्लॉग पे एक दूसरे की  हर एक पोस्ट की तारीफ करते जाना कहां का तक सही हैं?

    क्या ऐसे माहोल मैं अग्रीगेटर की कोई आवश्यकता है?
    हाँ एक इस्तेमाल हमेशा देखा अग्रीगेटर का. सभी गिनने मैं लगे रहते हैं मेरी पोस्ट क्या टॉप पे अधिक टिप्पणी ले के पहुंची?  और यह बुखार इतना गंभीर है की किसी ब्लोगर को खुश करना हो तो एक टिप्पणी २ बार नहीं तो ४ बार पोस्ट करो. आज चिठाजगत बंद है लेकिन प्रेम प्रकट करने का यह तरीका बादस्तूर चालू है क्यों की शायद यह हमारी आदत मैं शामिल हो चुका है.


    आप यदि ब्लॉग के ज़रिये अच्छा काम कर रहे हैं , सामाजिक सरोकारों से जुड़े हैं तो बहुत अधिक सहयोग की आशा ना रखें. अक्सर ऐसे ब्लोगेर पीठ पीछे की चर्चा का विषय बने रहते हैं और उनकी कमियाँ या ग़लतियाँ निकालने के लिए हर समय लोग तैयारी मैं मिल जाएंगे. सामने से आप से कोई कभी शिकायत नहीं करगा फिर भी शिकवा दिल मैं रहेगा.

    हाँ यदि SMS Joke वाले ब्लोगर हैं तो फ़िक्र की कोई बात नहीं..मोबाइल से joke भेजते रहो,टिप्पणी करते रहो, २ साल के अंदर अवश्य महान  ब्लोगर बन जाओगे.
    इमाम हुसैन (ए.स) ने कहा था" बिना बहुत से लोगों को नाराज़ किये आप कोई अच्छा काम नहीं कर सकते. " इसका यह भी मतलब हुआ की यदि आप से सभी सहमत है तो यकीन कर लें आप ग़लत हैं..
    अंत मैं अपने नए और पुराने ब्लोगर भाई बहनों से अवश्य कहूँगा, टिप्पणी कहीं भी और कितनी भी करें, लेकिन अच्छी  पोस्ट पे, या नए ब्लोगेर की पोस्ट पे टिप्पणी अवश्य करें. कोशिश  करें की पोस्ट को पढ़ें और यदि पोस्ट समाजिक विषयों पे है तो उसमें अपना सहयोग भी दें और ब्लोगर का उत्साह भी बढाएं. उसकी कमियाँ या ग़लतियाँ निकाल के ,हतोत्साहित ना करें. हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.

    यदि आप को "अमन के पैग़ाम" से कोई शिकायत हो तो यहाँ अपनी शिकायत दर्ज करवा दें. इस से हमें अपने इस अमन के पैग़ाम को और प्रभावशाली बनाने मैं सहायता मिलेगी,जिसका फाएदा पूरे समाज को होगा.
    ब्लोगेर की आवाज़ बड़ी दूर तक जाती है, इसका सही इस्तेमाल करें और समाज को कुछ ऐसा दे जाएं, जिस से इंसानियत आप पे गर्व करे. 

    अभी अभी खबर मिली है की धडाधड महाराज वापस आ गए और साथ मैं लाए नए साल का तोहफा  तोहफा सतीश जी(५२)  के लिए,प्रवीण पाण्डेय(४५) और अरविन्द्र मिश्रा जी के लिए (३३)
    भाई यह तो मज़ाक था लेकिन नाम के आगे सही टिप्पणी संख्या लिखी है मैंने और धडाधड महाराज तोहफे मैं टिप्पणी संख्या कुछ और ही बढ़ा के बता रहे हैं.. धडाधड महाराज राज़ी तो क्या करेगा काजी.
    डॉ अमर कुमार के लिए प्रार्थना - सतीश सक्सेना [92] किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार [85] दशक शुभकामना! [49]

    यह बात यहाँ कह देना आवश्यक समझता हूँ की यह चिठाजगत चलने   वालों की ग़लती नहीं है. सिस्टम की तकनिकी प्रॉब्लम है इसलिए इसको एक JOKE की तरह लें.
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    15 comments:

    DR. PAWAN K MISHRA said... December 23, 2010 at 10:26 AM

    गुट में रहना इंसान की फितरत है पर गुटबाजी तो नालायकी है टिप्पणियों पर सहमत
    ज्यादा टिप्पणिया किसी रचना को श्रेष्ठ नहीं बनाती. अल्लम गल्लम टिप्पणिया देने से एग्रीगेटर पर आप ऊपर तो आ जाते हो पर रचनाकार के रूप में नहीं
    धन्यवाद
    --

    Shah Nawaz said... December 23, 2010 at 11:10 AM

    आपने एक सही समस्या की और इंगित किया है... वाकई टिप्पणियों की चाहत के चलते... धडाधड टिप्पणिया की जाती हैं, जिससे की खुद को भी धडाधड टिपण्णी प्राप्त हो.... मैं वयस्तता के कारण बहुत कम टिपण्णी कर पाता हूँ... इसकी दो वजह हैं, टिपण्णी करने की जगह और अधिक पोस्ट पढने का फायदा हो जाता है, दुसरी और सबसे अहम् वजह है की मुझसे टिपण्णी करना ही नहीं आता है... आप अगर ध्यान देंगे तो अधिकतर ३-४ शब्दों में ही टिपण्णी करता हूँ...

    मगर पोस्ट काफी सारी पढ़ लेता हूँ... वैसे किसी भी लेखक को सच्ची ख़ुशी तभी मिलनी चाहिए की अधिक से अधिक लोग उसके विचारों को पढ़ें ना कि अधिक से अधिक लोग उसकी पोस्ट को पढ़े बिना ही झूटी तारीफें करें...

    सुशील बाकलीवाल said... December 23, 2010 at 12:27 PM

    मैं अपने पढने और टिप्पणी करने में एक संतुलन बनाये रखने का प्रयास तो करता ही हूँ ।

    सतीश सक्सेना said... December 23, 2010 at 12:39 PM

    मासूम साहब ,

    यह पर्चे क्यों बांटे जा रहे हैं, इससे " विद्वान् " लोग, गलत अंदाज़ा लगाने में देर नहीं लगायेंगे और फिर देते रहना अपनी सफाई महाराज ...

    फ़िलहाल मैंने कुछ अंडरस्टैंडिंग बना ली है धडाधड महाराज से कि हमारी टिप्पणियों को बढ़ा कर बताएं, मेरे ग्रुप में डॉ अरविन्द मिश्र और प्रवीण पाण्डेय भी शामिल हैं :-) आप भी जुगाड़ लगाएं !

    कृपया इस पर्ची को हटा दें इससे हमारा ही नहीं बिचारे चिटठा जगत का भी आप अनजाने में नुक्सान कर रहे हैं

    एस.एम.मासूम said... December 23, 2010 at 4:15 PM

    सतीश भाई इस लेख़ का विषय "अजब ब्लॉग जगत की गजब कहानी है" इस ब्लॉगजगत मैं हो रही जो बात मुझे समझ नहीं आती या अजीब सी लगती है उसको मैंने पेश किया है.मुझे आप से ही सबसे अधिक इस

    ब्लॉगजगत की राहों को समझने का मौक़ा मिला है और मैं जानता हूँ की आप सही हैं क्यों की आप इस ब्लॉगजगत की सोंच को मुझसे अधिक बेहतर तरीके से समझते हैं. लेकिन काले चश्मे से सफ़ेद चीज़ को देख के काला कहने का दस्तूर सही नहीं है.
    .
    कल रात जब चिठाजगत खुला तो मुझे भी ख़ुशी हुई . और उत्सुकतावश मैंने अपनी पोस्ट की तलाश शुरू की. वोह भी मिली और और आदतानुसार टॉप पोस्ट भी तलाशी. देखा तो कुछ पोस्ट की टिप्पणी संख्या अलग दिख रही है.. यह एक अजीब सी बात थी, आप को भी बता दिया और पोस्ट मैं भी लिख दिया, यदि इन पोस्ट मैं मेरी भी पोस्ट होती तो उसका भी ज़िक्र अवश्य करता. आपका व्यंग की "मेरे ग्रुप में डॉ अरविन्द मिश्र और प्रवीण पाण्डेय भी शामिल हैं", मुझे सही नहीं लगा क्यों की यह व्यंग मेरी सीधी बात को अलग रंग दे सकती है..और अमन के पैग़ाम को पसंद ना करने वालों की सहायता कर सकती है.
    .
    ब्लॉगजगत के " विद्वान् " लोग यदि चिठाजगत का इस्तेमाल करते हैं तो उनके लिए आवश्यक है की यह भी जानें की यह चलता कैसे है?
    धड़ धड महाराज मैं यह नंबर उसको चलाने वाला ना घटा सकता है ना बढ़ा सकता है, यह हर व्यक्ति जानता है.
    .
    यह चिठाजगत को मेरा सहयोग है और इसका नुकसान चिटठा जगत को किसी तरह नहीं हो सकता.

    इस बात को साफ़ ऐसे समझ लें की आप ब्लागस्पाट पे लिखते हैं अक्सर आप की पोस्ट की तारिख और समय ग़लत दिखाई देता है. क्या यह आप की या मेरी ग़लती है? नहीं यह किसी सेट्टिंग की कमी है.? इसको अगर बता दिया जाए तो ब्लोगर सही कर लेता है. यह मेरी नज़र मैं मदद हुई, ना की नुकसान.

    चिठाजगत अभी भी देर से खुलता है, आसानी से खुल जाता तो यह बात मैं वहां उनको भी ध्यान दिलाता.
    मैं ब्लॉगजगत की अंदरूनी राजनीती से हमेशा अलग रहा और मुझे उसमें कोई दिलचस्पी भी नहीं है. इसी कारण से सीधी बात भी मेरी कभी कभी लोगों को ग़लत लगती है.

    सतीश जी आप का एक बार फिर शुक्रिया.

    केवल राम said... December 23, 2010 at 4:19 PM

    मासूम जी
    आपने बहुत संजीदा तरीके से इस विषय पर पक्ष डाला है .......शुक्रिया

    एस.एम.मासूम said... December 23, 2010 at 4:52 PM

    डॉ पवन जी,शाहनवाज़ साहब.सुशील बाकलीवाल जी और सतीश भाई ,केवल जी आप सब का शुक्रिया की आप ने कुछ कहा ...

    सतीश सक्सेना said... December 23, 2010 at 4:54 PM


    आज कल चिटठा जगत आदि सारे संकलक संक्रमण काल से गुजर रहे हैं , यह सब बिना किसी के सहयोग के चलाये जा रहे हैं, और बढती ब्लॉग संख्या के कारण , सोफ्टवेयर हार्डवेयर पर जरूरत से अधिक लोड पड़ रहा है ! चूंकि यह काम सीमित शक्ति के जरिये ऐसे व्यक्तियों / व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है जो इसका श्रेय तक नहीं लेते हैं......

    मगर लाखों हज़ारों ब्लागरों में से कोई न कोई रोज़ इन्हें कम से कम एक बार गाली जरूर देता है ! इनके काम का पुरस्कार स्वरुप और कुछ तो छोडिये कोई इनकी तारीफ भी नहीं करता ....

    चिटठा चर्चा काफी समय से मेरे ब्लॉग के हवाले और सक्रियता सही नहीं दिखला रहा है , मगर मैं अगर अपना हित देखता हूँ तो मुझे चिटठा चर्चा के खिलाफ सिर्फ एक लेख भर लिखना है ...

    उसके बाद या तो वे इसे बंद कर घर आराम से बैठ जायेंगे या अपनी बदनामी रोकने के लिए मुझे संतुष्ट करने के लिए कम से कम मेरा ब्लॉग अवश्य अपडेट कर देंगे !

    ब्लॉग वाणी को बंद होने के पीछे अन्य कारणों के साथ एक कारण यह भी था !

    मैं समझता हूँ कि आप मेरे कमेन्ट का अर्थ समझ गए होंगे मगर मैं ऐसे कितने लोगों को समझा सकता हूँ मासूम भाई !

    shikha varshney said... December 23, 2010 at 5:04 PM

    यह बातें ब्लॉग जगत पर ही नहीं हर जगह लागू होती हैं.और ऐसा नहीं है कि आप मेहनत करें और उसका मोल न हो हाँ थोडा समय जरुर लग सकता है .वहीँ यह भी सत्य है कि आप अगर किसी को नहीं पढेंगे तो आपको कोई क्यों पढ़ेगा ?
    सौ बातों की एक बात. दूसरों के काम में नुक्ताचीनी निकालने की बजाय अपना काम इमानदारी से करें तो जरुर सफलता मिलती है.

    एस.एम.मासूम said... December 23, 2010 at 5:07 PM

    सतीश जी आप की बात से मैं सहमत हूँ ,हकीकत मैं जाहिल ही किसी बात को विवादास्पक बाया करते हैं. यह सच है की जिन्होंने काला चश्मा चढ़ाया हुआ है, उनको कौन समझेगा और जिनको चिठाजगत क्या है कैसे काम करता हैं उनको कौन समझेगा? मैं आप की बात से सहमत हूँ, इसी कारण मैंने बात को साफ़ भी किया..
    सतीश भाई आप का लेख़ आज पेश कर दिया है देख लें.. शुक्रिया

    ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said... December 23, 2010 at 5:33 PM

    मेरे विचार से टिप्‍पणियों पर पीएचडी की उपाधि हेतु शोध करने भर का मैटर इकटठा हो गया है।
    :)
    ---------
    मोबाइल चार्ज करने की लाजवाब ट्रिक्‍स।

    संजय भास्कर said... December 23, 2010 at 7:33 PM

    यह बातें ब्लॉग जगत पर ही नहीं हर जगह लागू होती हैं

    संजय भास्कर said... December 23, 2010 at 7:34 PM

    main manta hoon jo bhi kaam kare imaandari se kare..

    शरद कोकास said... December 25, 2010 at 12:32 AM

    यह सही चिंतन है और चिंता भी ।

    Mukesh Kumar Sinha said... December 25, 2010 at 3:09 PM

    kasssh ham apne kaam me imandaari dikha paen......:)

    Item Reviewed: अजब ब्लॉगजगत की गजब कहानी भाग -२ टिप्पणी ब्लोगर समूह Rating: 5 Reviewed By: M.MAsum Syed
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