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    Saturday, June 30, 2012

    आज बंद कमरों में सब कुछ आसानी से हों जाता है


    जब जब प्रेमी जोड़े सामाजिक बंधनों को तोड़ के अपनी प्यार की दुनिया बसाना चाहते हैं तो यह समाज उसे कुबूल नहीं करता | सवाल यह उठता है कि क्या यह समाज प्यार का दुश्मन है ?
    ऐसा नहीं है कि यह समाज प्यार का दुश्मन है बल्कि इस समाज ने ऐसे बहुत से कानून खुद से ही बना लिए हैं जिनकी कोई आवश्यकता ही नहीं थी | जैसे धर्म और जाति के बंधन इत्यादि |

    नौजवानों पे समाज के अधिक बंधन उनके अपने जीवन साथी का चुनाव करने में एक बड़ी बाधा है | सही तरीका तो यह है कि अपने बच्चों को अच्छी परवरिश दो ,उन्हें समय रहते अच्छे बुरे कि तमीज सिखाओ और फिर देखो सही समय आने पे कैसे वो अपना जीवन साथी चुनते हैं | यदि आपको लगे कि उनका चुनाव उनके भविष्य के लिए गलत है तो उन्हें प्यार से समझाओ न कि उनका सामाजिक बहिष्कार करो |
    आज बंद कमरों में वो सब कुछ आसानी से हों जाता है जो शादी के बाद होना चाहिए था | न किसी को पता लगता है और न ही कोई पूछता है कि तुम्हारा साथी किस जाति का है किस धर्म का है ? दोस्ती के नाम पे सब चलता है | लेकिन जैसे ही ऐसे किसी जोड़े ने सही फैसला लेटे हुए शादी कि बात कि वैसे ही पचासों सवाल उठने लगते है कि कौन सी बिरादरी है, किस जाति का है? और इसी आधार पे सामाजिक बहिष्कार, सजा इत्यादि तय कर दी जाति है |

    यह सत्य है कि शादी से पहले किसी भी जोड़े को यह अवश्य देख लेना चाहिए कि क्या उन दोनों कि सोंच, पसंद , ना पसंद मिलती जुलती है? यदि दोनों का धर्म अलग है तो यह अच्छा होता है कि दोनों विचार विमर्श कर के किसी एक धर्म को चुन लें | समाज को उन्हें समझाने का तो हक है लेकिन सजा या सामाजिक बहिष्कार का हक नहीं है |

    युवाओं को अपनी मर्ज़ी से अपनी ज़रूरत के समय अपना जीवन साथी चुनने का पूरा अधिकार है और उन्हें यह आज़ादी मिलनी ही चाहिए |
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    11 comments:

    रचना said... June 30, 2012 at 9:42 AM

    दोनों विचार विमर्श कर के किसी एक धर्म को चुन लें |

    why ?? both can live together after marriage and follow rituals of both the dharma

    if their kids get married and 2 new dharmas get added then their family will be really INDIA

    hindu muslim sikh issaaiii

    M VERMA said... June 30, 2012 at 10:05 AM

    प्यार धर्म, मजहब से ऊपर है. पूर्णतया रचना जी से सहमत

    राजन said... June 30, 2012 at 10:19 AM

    रचना जी से सहमत हूँ.
    और देखने वाली बात यह भी हैं कि जब उस जोडे को एक दूसरे से कोई शिकायत या मतभेद नहीं हैं तो आप और हम कौन होते हैं उन पर अपनी मर्जी थोपने वाले? यदि दोनों में से कोई भी एक दूसरे को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं कर रहा हैं तो इससे तो यही साबित होता हैं कि वह दोनों अपने धर्म के साथ ही अपने साथी के धर्म का भी सम्मान कर रहा हैं.हाल ही का मामला सैफ करीना का हैं दोनों की सोच काबिले तारीफ हैं.दूसरों को इनसे कुछ सीखना चाहिए.

    Arshad Ali said... June 30, 2012 at 12:29 PM

    PYAR TO PYAR HAI ...WO KYA JANE KABA KASHI...JAAT PAAT SE KYA LENA DENA...
    KAB RAHA WO SAMAJ KA DASI...

    PREM TO SAB KARTE HAI...PUCHH LO UNHE BHI JO PREMIYON SE NAFRAT KARTE HAIN.

    Arshad Ali said... June 30, 2012 at 12:29 PM

    PYAR TO PYAR HAI ...WO KYA JANE KABA KASHI...JAAT PAAT SE KYA LENA DENA...
    KAB RAHA WO SAMAJ KA DASI...

    PREM TO SAB KARTE HAI...PUCHH LO UNHE BHI JO PREMIYON SE NAFRAT KARTE HAIN.

    राजन said... June 30, 2012 at 12:53 PM

    @PUCHH LO UNHE BHI JO PREMIYON SE NAFRAT KARTE HAIN
    वाह वाह अशरद अली जी!
    ये बात मैंने भी कई बार कहनी चाही है.

    S.M Masum said... June 30, 2012 at 10:39 PM

    रचना जी का जवाब यहाँ है | वैसे यह उनकी सोंच है और इसमें कोई बहस कि आवश्यकता भी नहीं है |
    http://www.payameamn.com/2012/06/blog-post_30.html

    रचना said... June 30, 2012 at 11:58 PM

    रचना जी का जवाब यहाँ है | वैसे यह उनकी सोंच है और इसमें कोई बहस कि आवश्यकता भी नहीं है |
    http://www.payameamn.com/2012/06/blog-post_30.html

    waah apni dusri psot padhwaanae kaa sugam tarikaa haen
    meare kis baat kaa jawab wahaan haen ???
    hamesha bhrm uttpan naa hi kiyaa karae

    एस.एम.मासूम said... July 1, 2012 at 5:47 AM

    आपका एक ही सवाल हुआ करता है |लेख पे कोई एतराज़ करो और उसी का जवाब मैंने अगली पोस्ट से दिया है क्योंकि टिपण्णी कि जगह मैं जवाब लेख से देता हूँ|

    रचना said... July 1, 2012 at 10:12 AM

    maene kab laekh par aetraaj kiyaa

    maene mehaj aap kae laekh ko vistaar diyaa thaa

    aap kament padhtey hi nahin haen shyaad aur baaki tippanikartaa usko padh kar sehmat huae

    एस.एम.मासूम said... July 1, 2012 at 10:29 PM

    भगवान् का शुक्र की आप की टिप्पणी से कोई सहमत तो हुआ? :)

    Item Reviewed: आज बंद कमरों में सब कुछ आसानी से हों जाता है Rating: 5 Reviewed By: M.MAsum Syed
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