Pages

For JAUNPUR HISTORICAL PLACES Tour

Jaunpur Qila! Badi Masjid ! bridge at Jaunpur

Saturday, August 4, 2012

आखिर अन्ना का दोष क्या है ?

जब अन्ना अनशन करते थे तो कांग्रेस पार्टी के लोग कहते थे   लोगों के बीच जाके वोट  लो और जीत के संसद में आओ । अब जब अन्ना ने अपने लोगों को जनता के बीच ले जाने का फैसल किया तो यही कांग्रेसी उनका मज़ाक बना रहे हैं । क्यों?
केवल कांग्रेसी ही नहीं राजनीती से जुड़े बहुत से दलों के लोग उनके इस फैसले को ग़लत ही नहीं बल्कि उनकी नीयत ख़राब है जैसी बातें  भी कर रहे हैं । ऐसा लगता है कि राजनीती में आना शरीफों का काम नहीं रह गया है आज ।
क्या आज सच में राजनीती में आना. इलेक्शन लड़ना, जनता से वोट  माँगना यह सब शरीफों का काम नहीं रह गया ?


यह अन्ना के खिलाफ बोलने वाले नेताओं की बातो  से तो ऐसा ही लगता है ।
अब सवाल यह होता है कि क्या अन्ना ने किसी नेता का या जनता का माल खाया, कोई घोटाला किया या देश का नुकसान किया ? यदि नहीं तो इतना शोर  उनके खिलाफ क्यों? 

क्या देश से भ्रष्टाचार मिटाओ जैसी बातो के लिए भूखा रहना और सरकार पे दबाव बनाना पाप है?

आज इस ब्लॉगजगत में भी बहुत से लोग अन्ना हजारे के खिलाफ बोलते नज़र आ रहे हैं लेकिन वही लोग उनके खिलाफ कभी नहीं बोले जिन्होंने अरबो का घोटाला कर के देश को खोखला किया और आज भी कर रहे हैं?

लगता है आज यह समाज इतना भ्रष्ट हो चूका  है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला उन्हें अच्छा नहीं लगता और  भ्रष्टाचारी देवता सामान लगता है ।

Friday, July 27, 2012

अन्ना हजारे का शो फ्लॉप क्यों?


अन्ना हजारे का शो फ्लॉप  क्यों? 

जी हाँ कल शाम से मीडिया में शोर है अन्ना हजारे का शो फ्लॉप हुआ । मुझे ताज्जुब भी नहीं हुआ क्यों की यदि अन्ना अन्य नेताओं की तरह किराये की भीड़ इकठ्ठा कर  लेते या सच में उनके इस मिशन में  अधिक लोग उनके साथ हो जाते तो शक होता की कहीं अन्ना भी तो "अपनी दाल पे रोटी नहीं खींच रहे? "

जब भी कोई नेक काम करो, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ो  तो आपके पीछे चलने वाले दिन बा दिन सख्तियों से डर  के कम होने  लगते हैं ।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना इतना आसान नहीं या कह लें "एक आग का दरिया है और डूब के जाना है "  ऐसे जीने से पहले खुद को इतना मज़बूत बना लेना होगा कि आप समाज के इन मज़बूत भ्रष्ट लोगों की नाराज़गी को झेल पाएं | सब्र ओर नम्रता को अपना हथियार बनाना होगा | इंसानों के चेहरे पे हंसी लाने के लिए पहले अपने चेहरे का दुःख छिपा के मुस्कराना होता है | यदि आप से खुद कोई ग़लती हो जाए और सामने वाला आप को गाली ही क्यों न दे ,आप को अपना गुस्सा पी के अपनी ग़लती को सुधार लेना चाहिए | आप यदि गुस्से में अपनी ताक़त का इज़हार करेंगे या जैसा कि अक्सर होता है कि अपनी ग़लती को नज़रंदाज़ कर के सामने वाले की ग़लतियाँ गिनवाने लगेंगे तो आप भी ज़ुल्म करने वालों में गिने जाएंगे | समाज से इन बुराईयों को हटाने के लिए हर इंसान को सच्चे दिल से कोशिश करनी चाहिए ओर मिल जुल कर यह काम करना चाहिए | यह और बात है कि समाज में फैली कुरीतियों या बुराईयों से लड़ने वाला अक्सर अकेला ही पाया जाता है | लेकिन सत्य में इतनी ताक़त हुआ करती है कि ऐसा इंसान दुनिया में भी इज्ज़त पाता है ओर बाद मरने के भी हमेशा याद किया जाता है | इसीलिये कहा जाता है नेक इंसान जो समाज के भले के लिए काम करता है कभी नहीं मरता |

यदि अन्ना इमानदार हैं तो समय के साथ साथ उनकी जीत अवश्य होगी।

Monday, July 23, 2012

क्या किसी महिला के कपडे सरेआम उतारना इन्साफ है ?



आज जब खबरें देख रहा था तो अचानक एक ऐसी खबर पे नज़र पडी जहां कौन सही ओर कौन गलत का फैसला करना मुश्किल लगा | उदयपुर में  एक शादी शुदा महिला अपने पडोसी प्रेमी के साथ भाग गयी | गाँव वालों ने उस जोड़े को पकड़ा ओर उसके बाद इनकी सार्वजनिक पिटाई कि गयी फिर इन दोनों को की इज्जत को सरेआम उछाला गया। सरेआम न सिर्फ युवक के बाल काट दिए गए बल्कि महिला के कपड़े भी उतारे गए ओर उसे घुमाया गया | इन्हें गांव के चौपाल में सबके सामने बिठाया गया ओर यह कार्यक्रम ४ घंटे तक चलता रहा इसके बाद मामला पोलिसे के हाथ में चला गया |

इस पूरी खबर में यह बात तो साबित है कि महिला ओर उसका पडोसी इस बात के दोषी हैं कि जब वो महिला शादी शुदा थी तो उसको गैर मर्द के साथ भागने कि आवश्यकता क्या थी ?
लेकिन किसी महिला को दोषी होने के बावजूद सरेआम कपडे उतार के घुमाना भी इन्साफ नहीं बल्कि जुल्म है | ओर जितना वो महिला ओर पुरुष दोषी हैं उतना ही उस गाव के लोग भी |
किसी महिला को सरे आम कपडे उतार के घुमाना उसके किसी भी जुर्म कि सजा नहीं हो सकती |

आज के अन्य लेख

हिंदी ब्लॉगजगत और अमन का पैगाम का अंजाम