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Wednesday, June 29, 2011

कटुता का माहौल न बनाए मीडिया

नई दिल्ली, बुधवार, 29 जून 2011
प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने मीडिया की तीखी आलोचना करते हुए बुधवार को कहा कि वह ‘आरोप लगाने वाला, अभियोजन चलाने वाला और फैसले सुनाने वाला’ बन गया है।
उन्होंने देश में कटुता का माहौल पैदा करने के खिलाफ भी आगाह किया।
प्रधानमंत्री ने यहां संपादकों के एक समूह के साथ अपनी 100 मिनट की बातचीत इसी वक्तव्य के साथ शुरू की। उन्होंने कहा कि मीडिया में यह धारणा बनती जा रही है कि सरकार घिरी हुई है और अपना काम नहीं कर पा रही है।सिंह ने कहा कि देश में एक ऐसा माहौल बन गया है, जिसमें मीडिया ‘आरोप लगाने वाला, अभियोजन चलाने वाला और फैसले देने वाला’ बन गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह कोई भी संसदीय लोकतंत्र काम नहीं कर सकता।
हालिया घोटालों के मीडिया कवरेज के जाहिरा संदर्भ में सिंह ने कहा कि कभी-कभी सरकार को कोई फैसला करते वक्त सभी तथ्य ज्ञात नहीं होते। इसके बावजूद उसे फैसले करने होते हैं।
उन्होंने कहा कि बाद में विश्लेषण करने वाले नियंत्रक और महालेखा परीक्षक, संसदीय समिति या किसी अन्य निकाय के पास कहीं अधिक तथ्य होते हैं, जो उन लोगों के पास उपलब्ध नहीं होते हैं जो पहले फैसला कर चुके होते हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अगर सरकार और विपक्ष के बीच निरंतर टकराव से घिर जाए या सभी ओर कटुता भरा माहौल निर्मित हो जाए तो जनता की विकास और उद्यमशीलता से जुड़ी उमंग पूरी तरह से असर नहीं दिखा पाएगी। उन्होंने संपादकों के समूह से कहा कि यही बात मुझे सबसे ज्यादा चिंतित करती है।
सरकार को हर दिन सबसे भ्रष्ट करार दिए जाने से काफी नाखुश नजर आ रहे सिंह ने कहा कि वह अपनी जिंदगी में अधिकांश समय नौकरशाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात ने सबसे ज्यादा आश्चर्य में डाला कि कुछ नौकरशाह भ्रष्ट होते हैं, लेकिन उनसे कहीं अधिक लोग प्रलोभनों के बावजूद ईमानदार बने रहते हैं। सभी नौकरशाहों को भ्रष्ट करार नहीं देने का अनुरोध करते हुए सिंह ने कहा कि कदाचार करने वालों को दंडित किया जाना चाहिए और वे दंडित किए जाएंगे।
भ्रष्टाचार और कालेधन को बड़े मुद्दों के तौर पर स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इन समस्याओं से निपटने को लेकर प्रतिबद्ध है, लेकिन यह मानना गलत होगा कि ऐसी कोई जादुई छड़ी है जिससे तुरंत समाधान हो जाएगा।
प्रधानमंत्री ने यूरोप का उदाहरण दिया, जहां की अर्थव्यवस्था में करीब 25 फीसदी कालाधन है। सिंह ने सवाल किया कि आखिर विपक्ष और अन्य लोग किस आधार पर यह आरोप लगा रहे हैं कि भारत से चार लाख करोड़ रुपए का कालाधन विदेशों में ले जाकर जमा किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका आधार क्या है।प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार संशोधित दोहरे कराधान निषेध संधि को लेकर बातचीत करने की प्रक्रिया में है और उसने जी-20 में बैंकिंग व्यवस्था में सुधार लाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार कालेधन और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए वह सब कुछ करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो व्यावहारिक है।बहरहाल, उन्होंने एक ऐसी स्थिति के खिलाफ आगाह किया जिसमें भारत ऐसा देश बन जाए जिसमें हर कोई हर किसी की ‘पुलिसिंग’ करता नजर आए। सिंह ने कहा कि लाइसेंस-परमिट राज को वापस नहीं आने देना चाहिए।

2 comments:

Ratan Singh Shekhawat said...

१-मिडिया इनकी प्रसंसा करे तो बढ़िया नहीं तो कटुता बढती है |
२-यूरोप की अर्थव्यवस्था में २५% काला धन है यहाँ भी काले धन को स्वीकार लें ?
३-कोई भ्रष्ट को भ्रष्ट नहीं कहे तो प्रधान मंत्री जी क्या कहें ?
अब तक का सबसे कमजोर प्र.मंत्री !!!

डॉ. मनोज मिश्र said...

चलिए यह देखने वाली बात होगी की प्रधानमंत्री जी आगे क्या करते हैं.