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    Saturday, May 28, 2011

    ये हवाएं तुझे ऊँचा उठाने के लिए हैं

    baaz
    अल्लामा इक़बाल फ़रमाते हैं कि

    तुन्दिये बाद ए मुख़ालिफ़ से न घबरा ऐ उक़ाब 
    ये तो चलती हैं तुझे ऊंचा उड़ाने के लिये 

    शब्दार्थ ,बादे मुख़ालिफ़-विपरीत हवा , उक़ाब-बाज़
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    11 comments:

    nilesh mathur said... May 28, 2011 at 11:16 PM

    बहुत ही सुन्दर और बेहतरीन फ़रमाया है!

    सुशील बाकलीवाल said... May 29, 2011 at 8:51 AM

    तुन्दिये बाद ए मुख़ालिफ़ से न घबरा ऐ उक़ाब
    ये तो चलती हैं तुझे ऊंचा उड़ाने के लिये.

    वाकई सार्थक सन्देश...

    Arvind Mishra said... May 29, 2011 at 9:18 AM

    kyaa khoob ..vaah !

    Kunwar Kusumesh said... May 29, 2011 at 9:43 AM

    बहुत प्रेरक और प्यारा शेर ब्लॉग पर लगाया है आपने.
    इसे पढ़ते ही मुझे अपने निम्न शेर याद आ गए.देखिएगा:-

    अलमस्त अंधेरों के मुक़ाबिल खड़ा हुआ,
    हिम्मत की इक मिसाल ये जुगनू हवा में है.
    अच्छे-बुरे को अपनी कसौटी पे तौलती,
    जो दिख न सके ऐसी तराज़ू हवा में है.

    Udan Tashtari said... May 29, 2011 at 10:02 AM

    आभार पढ़वाने का.

    akhtar khan akela said... May 29, 2011 at 10:53 AM

    maasum bhaai khuda kare aesi unchi udaan hmare sbhi bhaaiyon ko kamayaabi ke sath mile aamin bhtrin prvaaz kaa hoslaa dene ke liyen shukriyaa ....akhtar khan akela kota rajsthan

    वीना said... May 29, 2011 at 10:03 PM

    बहुत खूब....

    WASEEEM AHMED said... June 2, 2011 at 12:37 AM

    अलमस्त अंधेरों के मुक़ाबिल खड़ा हुआ,
    हिम्मत की इक मिसाल ये जुगनू हवा में है.
    अच्छे-बुरे को अपनी कसौटी पे तौलती,
    जो दिख न सके ऐसी तराज़ू हवा में है

    post achhi hai aur in sheron ko kaha jayega sone pe suhaga.

    main hun ek chhota sa blogger, bilkul naya.
    Dua ke liye hazir hua tha janab ki Tarif sunkar.
    11 june ko mera nikah hai uske liye bhiaap dua kijiyega.
    ek do maah baad blogging karunga to aapse kuchh sikhna chahunga.

    Item Reviewed: ये हवाएं तुझे ऊँचा उठाने के लिए हैं Rating: 5 Reviewed By: M.MAsum Syed
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