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    Sunday, July 4, 2010
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    4 comments:

    Divya said... July 4, 2010 at 7:18 AM

    Lovely pics !

    Ek khoobsurat shehar ! Yahaan to sirf Aman aur sukoon hona chahiye !

    Shubhkaannayein !

    Sharif Khan said... July 4, 2010 at 8:46 AM

    http://haqnama.blogspot.com/
    काफ़िर हो तो शमसीर पे करता है भरोसा
    मोमिन हो तो बे तेग़ भी लड़ता है सिपाही
    अल्लामा इक़बाल

    Sharif Khan said... July 4, 2010 at 8:59 AM

    http://haqnama.blogspot.com/
    काफ़िर हो तो शमसीर पे करता है भरोसा
    मोमिन हो तो बे तेग़ भी लड़ता है सिपाही
    अल्लामा इक़बाल

    सलीम ख़ान said... July 5, 2010 at 2:40 PM

    काफ़िर हो तो शमसीर पे करता है भरोसा
    मोमिन हो तो बे तेग़ भी लड़ता है सिपाही

    Item Reviewed: मैदान इ जंग ( हक ओ बातिल का फैसला) Rating: 5 Reviewed By: M.MAsum Syed
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