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    Saturday, July 10, 2010
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    1 comments:

    इस्मत ज़ैदी said... July 10, 2010 at 7:16 PM

    साथी हाथ बढ़ाना .........
    वाक़ई इसी की ज़रूरत है आज ,मेल्जोल ,सद्भावना ,प्यार ,सदाचार जैसे गुणों के चराग़ को जलाए रखना है हमें,

    जब बात आश्ती की अम्न ओ अमां की आए
    बस इक यक़ीन ले लो और इक यक़ीन दे दो

    Item Reviewed: नयी आशा : मिल के रोशन करें Rating: 5 Reviewed By: M.MAsum Syed
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