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Friday, July 29, 2011

क्या कहा आपने शादी नहीं करेंगे?

क्या कहा आपने  शादी नहीं करेंगे?  परेशान ना हों भाई आप को तो केवल अपनी पसंद बतानी है. अभी इस सप्ताह मैंने दो  पोल  (POLL) किये और आश्चर्य जनक रूप से टिप्पणिओं से अधिक इमानदार  नतीजे सामने आये.
उन विषयों पे जहाँ लोग कम बोलना चाहते हैं पोल  (POLL) वैसे भी एक कामयाब तरीका हुआ करता है हकीकत जानने का.
आज हम जिस समाज मैं रह रहे हैं वहाँ शादी के पहले सेक्स या शादी के बाद पति या पत्नी के अलावा  सेक्स स्वीकार नहीं किया जाता. लेकिन ऐसा होता है यह भी सत्य है और बहुत से परिवारों मैं शादी के पहले सेक्स की इजाजत तो नहीं लेकिन  बहुत बुरा नहीं समझा जाता. और कई जगह तो बिना शादी जीवन साथ गुजरने मैं भी आपत्ति नहीं होती लोगों को.

 

इस श्रेणी का पहला POLL

1) आप को क्या लगता है?

 

 

2) शादी के बाद परायी स्त्री या पराये पुरुष से सेक्स


Wednesday, July 27, 2011

महिलाओं को दैहिक स्तर पर देखने की मानसिकता और महिलाओं का इसमें सहयोग है.

महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं  अतनी आम हो गयी हैं की आज किसी भी दिन के अखबार को उठा लें २-४ खबरें तो मिल ही जाएंगे. इसके बहुत से कारण हैं जिनमें एक कारण है महिलाओं को दैहिक स्तर पर देखने की मानसिकता और महिलाओं का भी   इसमें सहयोग है. 

चाहे वह सौंदर्य प्रतियोगिताएं हों या फिर किसी कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत, महिलाओं की भूमिका दैहिक प्रस्तुति दिखाई देती है. अन्यथा क्या कारण है कि एयर होस्टेस के लिए सुंदर युवतियां ही चाहिए होती हैं? क्या कारण है कि कार्यक्रमों में अतिथियों के स्वागत युवतियों से ही करवाया जाता है? क्या कारण है कि पुरूषों के सामानों के विज्ञापन आदि के लिए सुंदर युवतियां ही चाहिए होती हैं? क्या कारन है की विज्ञापनों और फिल्मों मैं महिलाओं के शरीर का प्रदर्शन पे ही ज़ोर दिया जाता है? क्या इन सबके पीछे महिलाओं को दैहिक रूप में देखने की मानसिकता निहित नहीं है? क्या शीला की जवानी, मुन्नी बदनाम हुई और इस जैसे तमाम आइटम गाने महिलाओं के प्रति केवल और केवल दैहिक आकर्षण पैदा नहीं करते हैं?
यदि हाँ तो महिलाएं इसके खिलाफ आवाज़ उठाने के जगह  खुद तंग कपड़ों मैं शारीरिक प्रदर्शन करके खुश होती हैं ? क्यों महिलाएं इन्ही फिल्म और विज्ञापनों मैं दिखने वाली अर्धनग्न मोडल और एक्ट्रेस की नक़ल करती हैं? 
मैं मानता हूँ की ऐसी महिलाओं की संख्या जो जाने या अनजाने मैं  इस काम मैं सहयोग कर  रही हैं  कम है लेकिन जितनी है वो भी अधिक है और एक बड़ा कारण बन रही है.

महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं का एक कारण महिलाओं को दैहिक स्तर पर देखने की मानसिकता और महिलाओं का इसमें सहयोग है.

Sunday, July 24, 2011

हिंदी ब्लोगिंग से कमाई , क्या है हकीकत ?

इस इन्टरनेट कि दुनिया मैं जितनी अधिक स्पैम (अवांछनीय) वेबसाइट घर बैठे या ऑनलाइन कैसे कमाएं पे बनी है शायद किसी और विषय पे नहीं बनी.दूसरा महिलाओं को  फंसाने वाला तरीका है  वो है फिल्म मैं काम करने के लिए संपर्क करें जैसे  मेल या ऑफर . आज ऑनलाइन कैसे कमाए  विषय पे बात करूँगा , फिल्म पे फिर कभी बात होगी .

 आप यदि इन ऑनलाइन कमाने का तरीका बताने वालों के  जाल मैं एक बार  फँस गए तो कुछ ना कुछ गँवा के ही आएंगे . ऐसी वेबसाइट मैं से अधिकतर आप को घर बैठे  कमाई का लालच दे कर लोग खुद की  कमाई  का जुगाड़ किया करते हैं. आप मेहनत करते हैं और फल उनको मिलता है. जब तक आप को पाता चलता है तब तक आप काफी समय और कुछ धन दोनों गँवा चुके होते हैं.


ऐसी बहुत सी वेबसाइट हैं जहां रजिस्टर करने पे ही १०० रुपये मिलते हैं बाद मैं कहीं मेल पढने के पैसे कहीं सर्वे के पैसे लेकिन हकीकत यह है कि आप १०० -२२० ताका पैसे महीनो मैं बना पाते हैं और उनमें से अधिकतर नहीं मिलते.

इन्टरनेट पे यदि आप कि वेबसाइट या ब्लॉग है तो आप विज्ञापन से अवश्य काम  सकते हैं और समीक्षा लेख लिख के भी पैसे बना  सकते हैं. इसके लिए आप कि वेबसाइट पे आने वालों कि संख्या जितनी अधिक होगी कमाई भी अधिक होगी और विज्ञापन भी अधिक मिलेंगे. यह वो रास्ता है जिसके लिए आप को ना किसी से जुड़ने कि आवश्यकता है और ना ही मौक़ा तलाशने कि, केवल आप मेहनत करें वेबसाइट पे आने वालों कि संख्या बढ़ाने की  बाकी काम तो इश्तेहार देने वाले और समीक्षा करवाने वाले कर लिया करेंगे. इस विषय पे किसी को अधिक जानकारी चाहिए तो मुझ से संपर्क कर सकता है.

आप कि हिंदी वेबसाइट यदि चर्चित है  और रोजाना उसपे आने वाले अधिक हैं तो वहाँ विज्ञापन से अच्छी  कमाई की जा सकती है लेकिन वहाँ भी गूगल एडसेंस आप को सहयोग नहीं देगा और दुसरे तरिके से आप यदि गूगल एडसेंस के विज्ञापन ले भी लें तो आप कि कमाई का एक बड़ा हिस्सा आपको खोना होता है और नतीजे मैं आप के हाथ कुछ नहीं आता.

हिंदी ब्लोगिंग से कमाई के लिए आप ब्लोगेर्स  से उनके लेख  मंगा  के कोई पत्रिका निकाल लें या ब्लॉगर के ब्लॉग का एक डेटा बना के या तकनिकी ज्ञान दे के कोई बुकलेट छाप  दें. इस से कुछ पैसे अवश्य आ जाएंगे.

 इसलिए हिंदी ब्लोगिंग से इतनी कमाई कर लेना कि आप के इन्टरनेट का खर्चा निकल आये तो संभव है लेकिन इतना काम लेना कि घर खर्च चल जाए या एक मोती रक़म हमेशा आती रहे संभव नहीं. हाँ हिंदी ब्लोगेर को समीक्षा लेख लिखने के अच्छे पैसे अक्सर मिल जाया करते हैं लेकिन उसके अवसर भी कम हैं और बहुत ही कम लोग या बड़े ब्लोगर ही उसका फायदा ले सकते हैं.

इस लेख को लिखने का मकसद एक है कि हिंदी ब्लॉग से पैसे बनाने के सस्ते आफरों  के चक्कर मैं पड़ के अपना कीमती समय बर्बाद ना करें.

मैं ऐसी दर्जन भर वेबसाइट पे आफर दिला सकता हूं जहां दिन बहर लगे रहने पे भी १०-१५ रुपये से अधिक आप बना नहीं सकते और यह कब मिलेंगे या मिलेंगे भी या नहीं कोई नहीं जानता.

इसलिए खुद कि वेबसाइट बनाओ और विज्ञापन से कमाओ और अधिक कमाने के लिए अंग्रेजी कि वेबसाइट बनाएं.

यदि किसी को यह जानना हो कि विज्ञापन कहाँ से मिलेंगे या अंग्रेजी मैं समीक्षा करने के पैसे कहाँ से मिलेंगे तो मुझ से संपर्क कर सकता है मैं उसे लिंक भेज दूंगा.

Saturday, July 23, 2011

ब्लॉगर ड्राफ्ट मैं "अ " मतलब हिंदी टाइप अब हो सकती है

कल मैंने देखा की गूगल महाराज प्रसन्न हुए और ब्लॉगर ड्राफ्ट मैं फिर से हिंदी भाषा मैं टाइप करने की सुविधा उपलब्ध  करवा दी. 
 
यह पोस्ट केवल एक खबर है टिपण्णी के लिए इस लेख को पढ़ें जिसे ख़ास तौर पे रचना जी से किये वादे को पूरा करने के लिए लिखा है.

आखिर इन मर्दों को शर्म क्यों नहीं आती?







Monday, July 18, 2011

आपकी तस्वीर कहीं पॉर्न वेबसाइट पे तो नहीं है?

आज इस ऑनलाइन के युग मैं फेस बुक ,और्कुट,टिविटर जैसी सोशल वेबसाइट पुराने दोस्तों से जुड़ने और नए दोस्त बनाने का बेहतरीन जरिया मानी  जा रही है.नौजवान लड़के लड़कियों मैं तो यही होड़ लगी रहती है कि कौन कितना खूबसूरत लग रहा है? और सुंदर लगने के लिए तो फिर वैसे भी कम या तंग कपड़ों मैं तस्वीर खिंचवानी ज़रूरी हुआ करती है.


अगर आप ने भी ऐसी तस्वीर अपने किसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पे डाल रखी है तो होशियार हो जाएं. कल मैंने एक समाचार पत्र मैं पढ़ा कि ऐसी तसवीरें अक्सर ग़लत हाथों मैं पड़ जाया करती हैं और संभव है कि आपनी तस्वीर किसी के पर्सनल कंप्यूटर के डेस्कटॉप या किसी पॉर्न वेबसाइट कि शोभा बढ़ा रही हो.
सूचना के लुटेरे इन सोशल वेबसाइट पर बने अकाउंट से लड़कियों कि तसवीरें कापी कर लेते हैं फिर इन्हें किसी पॉर्न साईट को बेच देते हैं. ऐसी सीडियां ५०-८० रुपये मैं बाज़ारों मैं बिका करती हैं.

जैसा इस अखबार ने बताया वैसा यदि सच है तो आप का या आपकी बेटी का सोशल वेबसाइट पे अपनी तस्वीर डालना कितना खतरनाक हो सकता है आप स्वम समझ सकते हैं.
तस्वीर यदि डालना ही हो तो ऐसी डालें जिनका ग़लत इस्तेमाल ना हो सके. यह तसवीरें कैसी होंगी यह शायद सभी समझते हैं.

सोशल वेबसाइट पे महिलाओं की तसवीरें डालना


Tuesday, July 12, 2011

चिट्ठा जगत डोट इन्फो एग्रीगेटर्स में क्या ख़ास है?

सबसे पहले तो मैं अपने उन सभी ब्लॉगर भाई बहनों का शुक्रिया अदा करूँगा जिन्होंने इस नए "ब्लॉग संसार" एग्रीगेटर् का स्वागत किया और २४ घंटो मैं ही २५ फलोवर हुए और ६१ लोग इस से जुड़ गए. यदि आप भी जुड़ना चाहते हैं तो अभी ३९ लोगों की जगह है. आप अपना ईमेल टिप्पणी मैं दें. जुड़ने के पहले नियम अवश्य पढ़ लें.


आप देख सकते हैं की इस चिट्ठा जगत डोट इन्फो एग्रीगेटर् में वो सभी खूबियाँ मौजूद हैं जो किसी ब्लॉगर को चाहिए. यहाँ quality पे ध्यान दिया जा रहा है ना की Quantity पे .

इस एग्रीगेटर् की खूबी यह है की आप जुड़ने के बाद अपना लेख़ खुद डाल सकते हैं और यदि आप को कोई और लेख़ भी किसी और ब्लॉगर का पसंद आया हो तो वो भी आप डाल सकते हैं. आप यदि कोई लेख़ डालने के बाद निकालना चाहें तो भी यह आप ही के हाथ मैं है.

जब आप चाहें आप खुद को इस एग्रीगेटर् से अलग भी कर सकते हैं. किसी प्रकार की बंदिश नहीं आप को.

आप जब भी यहाँ आएंगे आपको लगे गा की आप ब्लॉगजगत के चुने हुए बेहतरीन नयी लेख़ पढने को मिल रहे हैं. पहले दिन ही २०० से अधिक लोगों ने इसे देखा और आज यह संख्या अभी सी २०० के पार जा रही है जबकि दिन अभी शुरू ही हुआ है.

इस एग्रीगेटर् की कोशिश होगी की इस ब्लॉगजगत के अच्छे से अच्छे लेखको को आप तक पहुंचाए और नयी प्रतिभाओं को आप के सामने लाये. और यह काम सभी के सहयोग से संभव होगा क्यों की इस एग्रीगेटर् के मालिक भी आप हैं.


जल्द ही १०० लोगों को और जोड़ने का काम शुरू होगा और एक अलग हिसां बनेगा  जिसमें पुराने बेहतरीन लेखों को आप  के सामने लाया जाएगा.

यह एक ऐसा संकलक है जहाँ १०० लोगों की पसंद के लेखों की   चर्चा एक स्थान पे आप को देखने को मिलेगी. और मुझे भी अच्छे लेख़ अपनी उन ब्लॉग पे चर्चा के लिए मिल जाएंगे जहाँ मुझे चर्चाकार की हैसीयत से जोड़ा गया है. वो ब्लॉग हैं

तेताला
बगीची
चर्चा मंच


आशा है आप सभी का सहयोग मिलेगा.



चिट्ठा जगत डोट इन्फो
संयोजक
एस एम् मासूम

Monday, July 11, 2011

चिट्ठा जगत पे आयें और अपने ब्लॉग को जोडें ब्लॉग संसार से.

चिट्ठा जगत पे आयें और अपने ब्लॉग को जोडें ब्लॉग संसार से.

जी हाँ यह एक ऐसा संकलक है जहाँ सब कुछ आप के ही हाथ मैं होगा.
जल्दी करें क्यों की अभी केवल पहले आये १०० ब्लॉगर ब्लॉगर को ही इस संकलक से जुड़ने का अवसर मिलने वाला है.
 इस एग्रीगेटर्स से जुड़ना आसान है. आप मुझे ए मेल कर दें अपने ब्लॉग की लिस्ट या यहाँ टिप्पणी मैं अपना ए मेल मुझे दे दें.

जुड़ने के पहले इस एग्रीगेटर्स से कैसे जुड़ा जाए और नियम अवश्य पढ़ लें.



संचालक  
http://www.chitthajagat.info
 

Sunday, July 10, 2011

ब्लॉगर का नया रंग लेकिन आसान और सुंदर

जी हाँ जिन लोगों ने Blogger in Draft default पे tick कर रखा था अब उनको पुराना डैश बोर्ड नहीं दिखाई देता. जबकि अभी भी आप यदि Blogger in Draft से अपने ब्लॉग को लोगिन कर के make blogger in Draft my default पर से टिक मार्क निकाल दें तो आप जब भी लोगिन करेंगे तो आप को आपका पुराना डैश बोर्ड मिलेगा.

 

लेकिन अच्छा तो यही है की नए रास्तों पे चलना सीख लें क्यों की पुराना वाला आप्शन कब बंद हो जाए कोई भरोसा नहीं.

नए डिज़ाइन मैं आप को Edit Html का आप्शन भी नहीं मिलेगा. लेकिन इसे भी आप इस पते पे देख सकते हैं. http://www.blogger.com/html?blogID=1709620100769616590, इस  यु  आर  एल में केवल आप को यह १९ अंको वाला नम्बर बदलना पड़ेगा. यह नम्बर आप के ब्लॉग का नबर है जो आप को पोस्ट ड्राफ्ट करते समय यु आर एल की जगह मैं दिखेगा.

 इस नए डैश बोर्ड मैं आप के ब्लॉग की लिस्ट लोगों करने के बाद दिखेगी और हर एक के साथ ३ आप्शन लगे हैं. पहला एडिट का निशान दूसरा होम का निशान और ३सरा view blog
एडिट के  निशान  पे क्लिक करने से नयी पोस्ट का आप्शन खुलता है. होम के निशाँ पे क्लिक करने से template ,stat, layout सेट्टिंग इत्यादि आप्शन खुलते हैं.
डैश  बोर्ड के अंत मैं   Reading list मोजूद है जो आप के फालो किये हुए ब्लॉग की लिस्ट है.

एस.एम.मासूम’s ब्लोग्स

जैसे मेरे नाम के ब्लॉग लिखे हैं वैसे ही आप के नाम  का ब्लॉग लिखा होगा. उसपर क्लिक करने से आप के ब्लॉग की लिस्ट और फोल्लो किये ब्लॉग की लिस्ट अलग अलग दिखाई देगी.
आपके पुराने डैश बोर्ड के बाकी सभी आप्शन इस नए डैश बोर्ड मैं भी मोजूद हैं ,कुछ मैं नया बदलाव लाया
गया है जैसे विडियो अब आप you tube से सीधे अपनी पोस्ट मैं जोड़ सकते हैं .
यदि किसी ब्लॉगर को कोई मुश्किल हो रही हो या समझ ना आया हो तो टिप्पणी मैं बताएं.
मैं कोशिश करूँगा सभी आप्शन समझाने की.


इस विडियो की सहायता भी आप नए ब्लॉगर को समझने के लिए ले सकते हैं.

Thursday, July 7, 2011

सवाल यह उठता है की यह धन कौन देता है? किसको देता है? और क्यों देता है?

धार्मिक ट्रस्टों ,मंदिरों और मस्जिदों के खाते मैं बेशुमार दौलत का होना एक आम सी बात है.  अभी आज कल की खबरें हैं की त्रिवेन्द्रम (थिरूअनंतपुरम) के पद्मनाभास्वामी मंदिर में अभी तक एक लाख करोड़ का खजाना मिल गया है जबकि एक सबसे बड़ा, सुरक्षित व महत्वपूर्ण कक्ष अभी खोला जाना बाकी है. इसी प्रकार सत्य साईं के कमरे मैं लाखों के जवाहरात का मिलना भी अभी कल की ही बात है.

सवाल यह उठता है की यह धन कौन देता है? किसको देता है? और क्यों देता है?

कौन देता है यह धन इसका जवाब तो आसान है की श्रद्धालु अपने मन्नत पूरी होने पे और कभी कभी खुद की ख़ुशी से धार्मिक कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए यह धन देते हैं.
सबसे बड़ा सवाल यह है की क्या यह धन भगवान्, अल्लाह के काम आता है? यकीनना नहीं आता क्यों की यह अधिकतर तिजोरियों और बैंक के खतों मैं बंद पड़ा रहता है या फिर मुल्ला  और पंडो  का पेट  भरता  है.

मैं और धर्मों के बारे मैं टिप्पणी करने से हमेशा बचता हूं लेकिन इस्लाम मैं कहा जाता है की यदि कोई धन अल्लाह को देना हो तो उसे किसी ग़रीब को, ज़रुरत मंद को दो . क्योंकि तुम्हारे और गरीब  के हाथ के बीच मैं अल्लाह  होता है.इसका मतलब यह हुआ की यदि गरीब की मदद की जाए धन से तो यह धन अल्लाह के पास जाता है.

इसलिए इस्लाम मैं जब भी कोई इंसान धर्म के नाम पे पैसा देता है तो उसका दो ही मकसद होता है.

१) गरीब और ज़रुरत मंदों की मदद करना. वो चाहे मुफ्त चिक्तिसा सुविधा दे के की जाए, बेटी की शादी करवा के की जाए,रोटी औ कपडा और मकान का इंतज़ाम कर के की जाए या मुफ्त  शिक्षा सुविधा दे की जाए.

२) और धार्मिक स्थलों की देख रख करना और धार्मिक उपदेशों को दुनिया तक पहुँचाना .

शायद मंदिरों मैं धन देने वालों का भी मकसद यही हुआ करता है. श्रधालुओं का मकसद यदि अल्लाह की, भगवान् की ख़ुशी है तो उनको अपना धन खुद से गरीब तलाश कर उसकी मदद जैसे बन पड़े करनी चाहिए और मंदिरों और मस्जिदों को केवल उतना ही धन दिया जाए जितनी उनके रख रखाव के लिए आवश्यक है.


लेख लिखते समय ऐसे ही ध्यान आया की अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई तो जनता का सहयोग मिला, बाबा रामदेव ने काला धन हिन्दुस्तान वापस लाने के लिए आवाज़ उठाई तो भी जनता ने कम या अधिक साथ दिया.

अब यदि कोई इन मंदिर और मस्जिद के धन को समाज सेवा मैं लगाने के लिए आवाज़ उठाए और धरने पे बैठ जाए तो क्या तब भी जनता साथ देगी?
यह सवाल इस लिए मन मैं उठा क्यों की यह धन धर्म के नाम पे देने वाली जनता ही तो है.

Sunday, July 3, 2011

क्या एग्रीगेटर्स से ईमानदारी की अपेक्षा करना मूर्खता है?

ज़ाकिर अली ‘रजनीश की एक पुरानी पोस्ट पढ़ रहा था जो उन्होंने  हिंदी ब्लॉग के एग्रीगेटर्स पे लिखी थी जो एक इमानदार पोस्ट थी .उसमें जाकिर जी ने एक सवाल पूछा था की क्या एग्रीगेटर्स से ईमानदारी की अपेक्षा करना मूर्खता है? इसका जवाब सीधा साधा सा आज के हिंदी ब्लॉगजगत की स्थिति को देखते हुए एक ही है.


जी  हाँ यह मूर्खता है.


मैंने जब हिंदी ब्लॉगजगत मैं क़दम रखा तो धर्म युद्ध और  एग्रीगेटर्स के खिलाफ लेखो की बाढ़ सी आयी लगती थी. अमन का पैग़ाम के ज़रिये मैंने धर्म युद्ध को ठंडा करने का काम किया और ५७ ब्लोगेर्स के सहयोग के साथ सफलता भी मिली. लेकिन इन एग्रीगेटर्स का काम बादस्तूर चलता रहा . एग्रीगेटर्स कैसे काम करते हैं इसके तकनिकी जानकारी को मैं समझ सकता था इसलिए जब मैंने इसका कारण समझने की कोशिश की तो कुछ बातें सामने आयी.



हिंदी ब्लॉगजगत का दाएरा अभी बहुत छोटा है और यहाँ कुछ दिनों के भीतर ही ब्लॉगर एक दूसरे को को जानने और पहचानने भी लगते हैं. यह एक इंसानी फितरत है की वो अपने दोस्तों, हम ख्याल,हम शहर  लोगों का गुट बना लिया करता है. और उसको समय असमय मदद भी करता है. यह एग्रीगेटर्स भी हम जैसा कोई ब्लोगेर ही चलाता है, उसके भी दोस्तों के ब्लॉग होते हैं, वो भी बहुत से कारणों से किसी को खुश करना चाहता है किसी को नापसंद करता. बहुत बार उसके हम मिजाज़ गुट का दबाव भी उसपे पड़ा करता है.


ऐसे मैं एग्रीगेटर्स की नीतियां धरी के धरी रह जाती हैं और वो संकलक  “एक आँख का अँधा नाम नैनसुख बन के रह जाता है” . जब भी कोई एग्रीगेटर्स ऐसी ना इंसाफी करता है उसका शिकार आवाज़ उठाता है. नतीजे मैं उस एग्रीगेटर्स के सहयोगी सफाई देने के लिए आ जाते हैं और शिकार हुए ब्लॉगर को ही निशाना बना लिया करते हैं. नतीजा एक युद्ध की शुरुआत. और ब्लॉगजगत मैं असंतुलन की स्थिति का पैदा हो जाया करती है.




ब्लॉगवाणी
और चिट्ठाजगत के सुप्तावस्था मैं जाने के बाद से बहुत से संकलक नयी आ गए लेकिन आज भी कोई संकलक  इनदोनो की टक्कर का नहीं  है. इन दोनों के गूगल पेज रंक ४ आज भी हैं जो हिंदी संकलक के लिए एक बड़ी सफलता कहा जा सकता है. जबकि प्लोग्प्रर्हरी अभी २ पेज रंक पे ही टिका है और हमारी वाणी की ३ पेज रँक है.इन्डली अभी भी २ पेज रँक पे पड़ी है.


अधिकतर संकलक हस्तचालित हुआ करते हैं. या आप ऐसा कह लें की होते तो यह स्वचालित हैं लेकिन इसको अपने साथियों को खुश करने के लिए और कुछ के खिलाफ गुटबाजी के लिए हस्तचालित बना दिया जाता है.

आज मुकम्मल तौर पे स्वचालित संकलक की कमी इस हिंदी ब्लॉगजगत मैं महसूस की जा रही है. जहाँ ब्लोगर  एक बार अपने  ब्लॉग रजिस्टर करने के बाद बे फ़िक्र हो जाए की उसकी पोस्ट इमानदारी से संकलक पे आ रही होगी और उसको पढने वालों की संख्या के साथ कोई छेड़ छाड नहीं हो रही होगी.



यदि ऐसा कोई संकलक वजूद मैं नहीं आता  है तो इस हिंदी ब्लॉगजगत के इतना बड़ा होने तक इंतज़ार करें जब ब्लोगर एक दूसरे को शहर,घर नाम और जाति से हट कर केवल उसके लेखों से पहचान ना शुरू कर देंगे.

संकलक हकीकत मैं नए ब्लोगर की ज़रुरत है और पुराने ब्लोगर   का शौक.

अपने ब्लॉग के पाठक बढ़ाने के लिए आप इन कुछ एग्रीगेटर्स की सहायता ले सकते हैं.

http://technorati.com ,http://www.indiblogger.in ,http://clipped.in/Hindi,http://www.hindiblogs.org,http://www.blogadda.com
http://www.enewss.com,http://www.blogkut.com. http://www.raftaar.in,http://www.apnivani.com
http://hi.indli.com,http://www.blogarama.com , http://www.bloggapedia.com, http://www.blogflux.com ,http://www.blogcatalog.com, http://www.blogtoplist.com,http://www.bloglisting.net, http://www.hindilok.com, http://www.blogerzoom.com, http://www.blogtoplist.com/technology, http://www.blogrankings.com
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