BayaN ho jayega sub kuch zaban-e bezabaanee se, Bus itni shart' hai pal bhar ko tou bhi bezabaN ho ja. Jawaid
Saturday, May 28, 2011
Tuesday, May 24, 2011
Sunday, May 22, 2011
ज्योतिष संबंधी सॉफ्टवेयर कितने भरोसे मंद
शादी से पहले कुंडली मिलान करना , अपना भविष्य जान ने की उत्सुकता इंसानों मैं हमेशा से रही है. पहले इसके लिए ज्ञानी पंडितों से संपर्क किया जाता था लेकिन आज कल कम्पुटर का ज़माना है, मशीनी युग है. अब लोग कंप्यूटर कुंडली सॉफ्टवेयर का सहारा लेने लगे हैं. पहले के ज्ञानी पंडित कुंडली अपने ज्ञान और तजुर्बे से बनाते थे जिनपे विश्वास किया जा सकता था और यह काम हर पंडित नहीं कर पता था.
कुंडली बना ने मैं दो बातें अहम् होती हैं. एक तो कुंडली चार्ट बनाना और दूसरे उसको देख के भविष्य बताना या दो कुंडलीका मिलान करना. अधिकतर कंप्यूटर कुंडली सॉफ्टवेयर ,कुंडली तो सही बना लेते हैं, चार्ट सही बनता है लेकिन भविष्य वाणी संतोषजनक या भरोसे मंद नहीं हुआ करती.
इस बार जब मैं जौनपुर गया तो पाया की बहुत से इन्टरनेट साइबर कैफे मैं कुंडली मिलान का धंधा ज़ोरों पे है और उनके ग्राहक बहुत से पंडित भी हैं. यह पंडित स्वम कुंडली बनाना नहीं जानते, यह तो बस लड़के लड़की की जन्म तिधि, नाम इत्यादि ले कर साइबर कैफे मैं चले जाते हैं ,१०० रूपए दे के कुंडली बनवा लाते हैं. घर पे मिलान कर के खुद के हाथ से वही चार्ट बनवा के लोगों को दे देते हैं और बदले मैं २०००/- की दछिना पाते हैं.
इस कुंडली सॉफ्टवेयर ने साइबर कैफे वालों की भी जेब भरी क्यों की वो जिस कुंडली का १०० रुपया लेता है ,उसको बनाने का सॉफ्टवेयर मुफ्त मैं इन्टरनेट पे मिलता है और कोई भी डाउन लोड कर सकता है. उसमें नाम ,जन्म तिथि और जन्म स्थान भरने पे खुद ही कुंडली बन जाया करती है.
ज़रुरत और लोगों की अज्ञानता के पैसे तो आज सभी ले रहे हैं इस लिए साइबर कैफे वालों को क्यों दोष देना लेकिन आम इंसान को जागरूक भी होना चाहिए. आखिर आपने तो मेहनत से पैसे कमाए हैं क्यों उनको सस्ते मैं अज्ञानता वश कारण गँवा दें.
ज्योतिष संबंधी सॉफ्टवेयर के बताए भविष्य पे पूरा भरोसा ना करें केवल उनकी कुंडली चार्ट खुद निकाल कर पंडित से मिलन करवा लें.
Wednesday, May 18, 2011
क्या सच मैं एक नौजवान की नज़र मैं उसके अपने बेटे और बाप का दर्जा एक सामान हुआ करता है?
किसी नौजवान की ज़िंदगी से उनके बूढ़े बाप और औलाद का जुड़ा होना एक आम सी बात है.खून के रिश्ते से तो दोनों रिश्ते सामान अहमियत रखते हैं लेकिन क्या सच मैं एक नौजवान की नज़र मैं उसके अपने बेटे और बाप का दर्जा एक सामान हुआ करता है?
दर्जा तो बाप का ही बड़ा है लेकिन अहमियत और मुहब्बत अपनी औलाद से अधिक हुआ करती है ऐसा इस समाज मैं रह रहे लोगों को देख के महसूस हुआ करता है.अपना बेटा तो अपनी ज़िम्मेदारी है यह सब समझते हैं लेकिन अपना बुढ़ा बाप भी अपनी ही ज़िम्मेदारी है यह बहुत कम लोग महसूस किया करते हैं.
बच्चा बूढा एक सामान कहा जाता है और इसका कारण यही है की एक बूढ़े व्यक्ति का जिस्म भी कमज़ोर हो चुका होता है, और दिमाग भी. जैसे एक बच्चे के लिए सहारे के बिना चलना संभव नहीं होता , बूढ़े व्यक्ति के लिए भी सहारे की आवश्यकता हुआ करती है.
बच्चे को तो बाप का सहारा हर हाल मैं मिल ही जाता है लेकिन वही बच्चा जब बड़ा होता है और उसको सहारा देने वाले मां बाप बूढ़े तो वही बच्चा अपनी बूढ़े बाप की देख रख को एक बोझ समझता है. औलाद बड़ी होने पे कैसी निकलेगी किसी को नहीं पता होता लेकिन मां बाप का प्यार तो सभी देख चुके होते हैं फिर भी अपने बच्चे को पालना, उसके लिए खुद को कुर्बान कर देना जब बोझ नहीं लगता है तो बूढ़े मां बाप की ज़िम्मेदारी एक बोझ क्यूँ? क्या कोई ब्लॉगर इस पे प्रकाश डालेगा?

