सतना जिले का अजीब गांव बेटी की शादी करने की जगह
बेटी बेचने कि प्रथा
देश का हृदय कहा जाने वाला मध्य प्रदेश के पथरौंधा गांव में बेटी को ब्याहने के बजाय बेचने की शर्मनाक
प्रथा मौजूद है। यह अजीबो गरीब गांव सतना जिले में नौगद – मैहर रोड में
नौगद से लगभग 11 कि मी कि दूरी पर है। आम तौर पर बेटे के जन्म पर जश्न मनाया
जाता है, लेकिन इस गांव
में बेटी के जन्म पर जश्न मनाया जाता है। कारण है कि बेटी कमाकर उनका पेट भरेगी।
हर लड़की की यही हसरत होती है कि उनके घर बारात आए, अपने राजकुमार
के साथ डोली में बैठकर ससुराल विदा हो और एक नई जिंदगी की शुरुआत करें। लेकिन सतना
जिले के पथरौंधा गांव की कहानी ही कुछ और है। यहां बेटी के किशोरावस्था में आते ही
उसे मुम्बई भेज दिया जाता है, जहां अय्याश किस्म के अमीर बोली लगा कर महंगे दाम पर खरीदते हैं
और फिर शुरु हो जाता है अमानवीय खेल। इस अमानवीय खेल से मिलने वाले पैसे के एक
हिस्से से परिवार का गुजर बसर होता है। इस अमानवीय खेल की प्रथा को कायम रखने के
लिए बिरादरी में अपना एक तानाशाही कानून है जिस कानून के तहत बेटी का ब्याह करना
बहुत बड़ा गुनाह है।
आज के इस आधुकनिक दौर में भी ऐसी मानसिकता
के लोगों की मौजूदगी इस बात का एहसास कराती है कि पुरुष प्रधान समाज नारी जाती को
किस प्रकार के रुढ़िवादी प्रथाओं की जंजीर में बांधकर शोषण करता रहा है।


1 comment:
समझ नहीं आता कि ऐसे में भी देश के विकास का ढोल पीटने में सरकार कितनी आगे रहती है । मीडिया को भी शायद बिकने लायक इसमें कुछ नहीं दिखता । ऐसी कुप्रथाओं का विरोध वहीं से शु्रू होना चाहिए
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