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For JAUNPUR HISTORICAL PLACES Tour

Jaunpur Qila! Badi Masjid ! bridge at Jaunpur

Thursday, February 24, 2011

शिशु का मस्तिष्क पहले दो वर्षों में अधिक विकास करता है.

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आप का शिशु जब जन्म लेता है तो उसका मस्तिष्क सीखने के लिए तैयार होता है। जब वो आंखें खोलता है, उसकी बुद्धि अपने चारों ओर की चीज़ों को समझने के लिए तैयार हो जाती है। शिशु का मस्तिष्क हर समय से अधिक पहले दो वर्षों में विकास करता है इसी समय आप के शिशु को आप की सहायता की आवश्यकता अधिक होती है।

ऐसे मैं अपने बच्चे से बातें अधिक कीजिए और उसके साथ सम्पर्क स्थापित कीजिए। बच्चे की स्मरण शक्ति में वृद्धि करने वाली सबसे महत्वपूर्ण चीज़ आंखों का सम्पर्क तथा उससे बात करना है। उससे थोड़ा रुक – रुक कर बात कीजिए ताकि आप का बच्चा बात करने की शैली सीख सके। इस प्रकार वो शीघ्र ही अपने गले से निकली हुई आवाज़ों द्वारा आप की बातों का जवाब देने लगगे गा। आप उससे बातें करते समय जो ध्वनि निकालते हैं उससे वो प्रेम करता है उसे आभास होता है कि आप ने उसे समय दिया।
जब आप यह देखें कि आप का शिशु बहुत अधिक रो रहा है तो उसे गोद में उठा लिजिए, इस प्रकार वो तुरन्त यह समझ लेता है कि उसके परेशान होने से आप भी परेशान होते हैं और इसी कारण वो चुप हो जाता है।
बच्चे के लिए उचित खिलोना ख़रीदिए, अपने बच्चे को सुन्दर चित्रों वाली किताब दिखाइए, प्रतिदिन उसे घर से बाहर ले जाइए, दुकानों, पार्कों या ऐसे स्थानों पर जहां अन्य माता – पिता अपने बच्चों को ले जाते हैं आप भी उसे ले जाइए। अपने मित्रों के घर मिलने जाइए, बच्चे के साथ बाहर जाइए ताकि वो नई – नई चीज़ें देखे और उनसे परिचित हो सके।
अपने बच्चों के लालन – पालन के प्रति हमें संदैव सर्तक रहना चाहिए और ऐसी कोई बात नहीं करनी चाहिए जो उसके नन्हें से हद्दय को ठेस पहुंचाए। यदि आप चाहते हैं कि आप का बच्चा बड़ा होकर समाज का एक शिष्ट और योग्य नागरिक बने तो जन्म के बाद से ही उसके प्रशिक्षण पर ध्यान देना होगा।

Wednesday, February 23, 2011

आपके जीवन को प्रेरणाओं से भर देने वाला

२०११ ,फरवरी १५ से २4
अमन का पैग़ाम
आपके जीवन को प्रेरणाओं से भर देने वाला
साथियों ,
आप सब के सहयोग के साथ अमन का पैग़ाम अभी तक ५० लेख़ पेश कर चुका हैं ,इस पचासवें लेख़ के साथ मैं आप सभी लोगों का शुक्रिया अदा करता हूँ कि आपने इस श्रेणी को आगे बढाया और आज "अमन का पैग़ाम" अपने नाम से ही पहचाना जाता है. इस सप्ताह ब्लॉगजगत मैं मेरे  पेश किये लेख़ कुछ ऐसे लेखों और कविताओं के साथ जिनको सब से अधिक पाठक  आज तक मिले.


खुदा ने तो हमें एक धरती बख्शी थी लेकिन हमने हिंदुस्तान और पकिस्तान बनाया
भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है| यहां हर धर्म के लोग रहते हैं और कोई भी किसी भी धर्म को मानने के लिए स्वतंत्र है| यह सच है कि भारतीय इतिहास पर कुछ ऐसा बदनुमा दाग लगा है जिसे कभी मिटाया नही जा सकता| लेकिन यह भी सच है कि यही वो देश है जहाँ गीता और कुरान एक साथ पढ़े जाते हैं| ऐसे कुछ लोग ही हैं जो मनुष्यों में ज़हर भरने का काम करते हैं .   read more



जैसा बोओगे वैसा ही तो काटोगे. Garbage In Garbage Out

Parentsआज हम उस दौर मैं जी रहे हैं जहां अब ईमानदारी, सच्चाई , नसीहतें, उपदेश किताबी बातें बन के रह गयी हैं. आज जब इनकी बातें करो तो लोग वाह वाह तो कर देते हैं लेकिन यह बातें आज किसी को भी व्यावहारिक नहीं लगती.

जब खिलौने को मचलता है कोई गुरबत का फूल ।
आंसूओं के साज़ पर बच्चे को बहलाती है माँ


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जौनपुर कि मूली विश्व भर मैं अजूबा


mooliआप को जान के आश्चर्य होगा कि  यहाँ की मूली छह से सात फीट लंबी व ढाई फीट मोटी होती थी. इस मूली को जौनपुर की सीमा से लगे आधा दर्जन गांवों में उगाया जाता था. इन सभी गांवों के करीब से गोमती नदी बहती है. लिहाजा सिंचाई के भरपूर साधन रहे हैं. अपनी भौगोलिक परिस्थिति और खास किस्म की मिट्टी के चलते नेवार प्जाति की मूली जौनपुर में ही होती है

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 जौनपुर शिराज़ ए हिंद भाग १

fortjaunour1394 के आसपास मलिक सरवर ने जौनपुर को शर्की साम्राज्य के रूप में स्थापित किया और यह शर्क़ी वंश (1394-1479) के स्वतंत्र राज्य की राजधानी भी रहा है.
चलिए आज आप को जौनपुर के किले की सैर करवाता हूँ :
जौनपुर शहर में गोमती तट पर स्‍थि‍त इस दुर्ग का र्नि‍माण फि‍रोज शाह ने 1362 में कराया था। इस दुर्ग के भीतरी फाटक 26.5 फीट उंचा तथा 16 फीट चौड़ा है। केन्‍द्रीय फाटक 36 फीट उंचा है

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क्या आप बड़े ब्लोगर हैं? यदि हाँ तो अपनी काबलियत यहाँ दर्ज करवाएं

bloggerएक ब्लोगर क्या सोंचता है? किन किन आदतों का शिकार होता है? कौन कौन सी बीमारियाँ  इत्यादि का उल्लेख संछेप मैं किया है. देख लें  आपके बारे मैं क्या कहा गया है?

क्या बात है आप को सब समझ मैं आ गया ,अब ठीक है आप एक बड़े और समझदार ब्लोगेर हैं ,साझा  ब्लॉग (ब्लोगेर असोसिएसन)
की आवश्यकता आप को नहीं, खुद का ब्लॉग लिखें और फ़ौरन यहाँ अपनी काबलियत दर्ज करवाएं टिप्पणी कर के.

 

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मौत की आग़ोश में जब थक के सो जाती है माँ
इस नज़्म को अवश्य सुने

 

अमन का पैग़ाम

एस. एम. मासूम
Mumbai, India

Saturday, February 19, 2011

क्या आप बड़े ब्लोगर हैं? यदि हाँ तो अपनी काबलियत यहाँ दर्ज करवाएं

एक ब्लोगर क्या सोंचता है? किन किन आदतों का शिकार होता है? कौन कौन सी बीमारियाँ  इत्यादि का उल्लेख संछेप मैं किया है. देख लें  आपके बारे मैं क्या कहा गया है?

blogger ब्लोगिंग के बारे में लेख लिखना । , लगातार ब्लॉग लिखने में असमर्थ , क्या लिखें समझ नही आता ? , में आज पोस्ट नही करूँगा , मुझे इससे फरक नही पड़ता !,  बहुत लम्बी ब्लॉग पोस्ट ।सहायता पाने के लिए ब्लोगिंग करना ।, अपने ब्लॉग को बार बार रिफ्रेश करना,ये देखने के लिए के हिट्स कितने बड़े या कॉमेंट्स कितने बढे ।, Google Adsense  बार बार अपने एडसेंस अकाउंट को चेक करना की कितना पैसा बड़ा । , दूसरे ब्लोगेर की झूटी तारीफ करना।  ब्लॉग की कीमत जानना , अलग अलग वेबसाइट पर जाकर , अपने ब्लॉग पर दिखाना ।, एक ब्लॉग से दूसरे ब्लॉग पर जाना ।,ऐसे टिप्पणीकार जो पोस्ट की गई सामग्री से बुरी तरह से असहमत हैं ।, ब्लोगिंग का नशा होना ।, , ऐसा ब्लॉग चलाना जिसका प्राथमिक ब्लोगर छुट्टी पर हो या ब्लोगिंग न कर रहा हो ।,ब्लॉग पर विज्ञापन करना ।,ऐसा पाठक जो सिर्फ़ लेख पढता है , कमेन्ट नही करता।, ब्लॉग का जन्मदिन मनाना।,ब्लोगर का जन्मदिन मनाना  , किसी विशेष विषय के लेखों की लिंक देना ।, कई ब्लोग्स चलाना । , नए ब्लोग्स को या अन्य ब्लोग्स को बधाई देना । अपने मुह मियां मिठू बनना । , अपने ब्लोगर साथियों से अपनी तारीफ करवाना। , गुट बना के टिप्पणी करना। ,ब्लोगर मीटिंग की फ़िक्र करना। , इर्ष्या वश लोगों को दूसरे ब्लोगर के  खिलाफ भड़काना।, ब्लोगर्स की पार्टी । , तुम मुझे लिंक करो,में तुम्हे लिंक करूँगा, और हम दोनों की रंकिंग बढ़ने लगेगी ,अच्छा कंटेंट लिखना ,इस आशय से की कई ब्लोग्स या साईट से मुझे लिंक करेंगे ।, किसी विवाद के कारण अधिक ब्लॉग गतिविधि इसे blog swarm. भी कहते हैं । , गैर मित्रों को टिपण्णी पर प्रतिक्रिया न करना ।,.किसी अन्य ब्लॉग से सामग्री चोरी कर प्रकाशित करना , ब्लॉग चोर । , ब्लॉग एयर ब्लोगिंग का डर ।, एक ही राय ब्लॉग पर दोबारा प्रकाशित करना । पैसे की शान दिखाना , फोन से अपने ब्लॉग पे बुलाना।
 

क्या कह रहे हैं आप को कुछ समझ मैं नहीं आया? क्या आप का चेहरा भी इस आईने  मैं नहीं दिखा? फिर आप ना तजुर्बेकार नए ब्लोगर हैं आप किसी साझा ब्लॉग मैं जा कर कुछ तजुर्बे हासिल करें फिर टिप्पणी करें. 
क्या बात है आप को सब समझ मैं आ गया ,अब ठीक है आप एक बड़े और समझदार ब्लोगेर हैं ,साझा  ब्लॉग (ब्लोगेर असोसिएसन)
की आवश्यकता आप को नहीं, खुद का ब्लॉग लिखें और फ़ौरन यहाँ अपनी काबलियत दर्ज करवाएं टिप्पणी कर के. 

अमन का पैग़ाम का यह लेख़ अवश्य पढ़ें

ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर blog swarm

Thursday, February 17, 2011

कुछ इधर की कुछ उधर की

कभी कभी बहुत सी बातें एक साथ जमा हो जाया करती हैं और कहने का समय कम हुआ करता है ऐसा ही आज  मुझे लग रहा है. चलिए  आप  भी देखें क्या है इधेर का  और क्या है उधेर का .

कुछ दिन पहले जब बड़े बड़े हवाई जहाज़ों (हिन्दी ब्लॉग संकलको) के क्रैश होने की खबरें आने लगी तो सभी ब्लॉगर मैं अपना खुद का हेलिकॉप्टर खरीद लेने का जोश दिखाई देने लगा. बहुत से स्वनिर्मित संकलक दिखाई देने लगे , कुछ मशहूर हुए कुछ छिपे रह गए और फिर हमारीवाणी के आने के बाद ,कुछ लोगों के जोश मैं कमी आयी. लेकिन हकीकत मैं देखें तो इन छोटे  संकलकों से फैदा हुआ और आज यह निजी की हैसीयत से अच्छा काम कर रहे हैं. अब अपने पसंद के ब्लोगेर्स को पढना आसान सा हो गया है.

 

अभी यह जोश ठंडा ही हुआ था की अचानक शुरू हुआ  ब्लोगेर्स असोसिएसन बना लेने का जोश. और देखते ही देखते ५-५ ब्लोगेर्स असोसिएसन बन गए ,लोगों को नेओता भेजा जाने लगा , लोग बात करने लगे यहाँ  जाओ वहां  ना जाओ यह इसका है यह उसका है. कौन किसका है यह तो पता नहीं लेकिन यह बात साफ़ साफ़ दिखाई  दी की अपने ब्लॉग का प्रचार करने का आसान रास्ता लोगों को मिल गया और  नए पाठक मिलने की उम्मीद लिए लोगों दना दन न्योते स्वीकार करके  लेख भी लिखने शुरू कर दिए. कुछ ने तो केवल दोस्तों के असोसिएसन से खुद को जोड़ा और कुछ तो दुश्मनों से भी जा मिले. यह तो साफ़ दिखाई दे रहा है कुछ दिन यह असोसिएसन का बुखार हॉट हॉट रहेगा. 

सभी ब्लोग्गर्स जोश मैं हैं कोई आजमगढ़ जीत रहा है कोई लखनऊ तो कोई यूपी कोई बिहार, कोई कोई तो पूरा हिन्दुस्तान. वो गाना याद आ गया की..

लखनऊ हीले ,यूपी हीले सारा हिन्दुस्तान हीले ला

ब्लोगर असोसिएसन जब बनेला तो सारा ब्लॉगजगत हीले ला 

मुझे भी बुढ़ापे मैं संयोजकों की लहराती चाल देख के जोश चढ़ा संकलक तो मैं पहले ही बना ही चुका था और उसका फ़ाएदा भी मिला अब जौनपुर ब्लोगेर्स असोसिएसन भी बना डाली. बस एक बात का ध्यान इसमें रखा है की यह कहीं कूड़ेदान बन के ना रह जाए. इसलिए यहाँ केवल उन्ही को आमंत्रित किया जिनको जौनपुर से लगाव है , आना जाना है या उनका वतन है. मुंबई मैं वतन से दूर वतन की याद हमेशा आती रही अब मौक़ा मिला की मुंबई मैं बैठ के जौनपुर, लखनऊ ,कानपूर बनारस , इलाहबाद का मज़ा लिया जाए तो ऐसा मौक़ा कैसे हाथ से जाने देता. 

वैसे भी नुकसान मैं फ़ाएदा  तलाश लेना मेरी आदत सी रही है. अब यह नुकसान चाहे हिंदी ब्लॉग संकलकों के बंद होने का हो या फिर ब्लोगेर्स असोसिएसन मैं झगड़ों का.

यदि कोई भी ब्लोगर मेरे बताए हुए इलाके से है और जौनपुर का मज़ा अपने शहर मैं बैठ के लेना चाहता है तो मुझे मेल कर दे , उसको शामिल किया जाएगा.

 

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अमन का पैग़ाम पे जहां हमेशा सावन को लहराती फसल लहराती रहती थी अचानक व्यस्तता के कारण लेखों और कविताओं का अकाल सा पड़ गया ,मैं सभी ब्लोगर्स का शुक्रगुजार हूँ की उन्होंने  सहयोग दे के इसे टिप्पणिओं के अकाल से बचा लिया. अब जब बात चल ही गयी है टिप्पणिओं की तो एक बात कहता चलूँ , अमन का पैग़ाम या इससे  जुड़े किसी भी ब्लॉग पे सहमती या असहमति वाली टिप्पणिओं को एक नज़र से देखा जाता है और हर एक  टिप्पणी करने वाले पाठक को इज्ज़त दी जाती है. 

पाठक निराश ना हों अभी भी बहुत से लेख और कविताएँ के ब्लोगेर्स के अमन का पैग़ाम से पेश करना बाकी है जिन्हें समय मिलते ही पेश किया जाएगा. यदि किसी ब्लोगेर को अपनी कविता या लेख पेश करना हो तो मुझे मेल कर दें.

 

www.hamarivani.comहमारीवाणी हिंदी भाषा के प्रचार एवं प्रसार के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए ऑनलाइन पत्रकारिता के क्षेत्र में हमारीवाणी ई-पत्रिका एक अच्छी शुरूआत है .हमारीवाणी संपादक मंडल मैं मुझे समन्व्य संपादक की जगह दी गयी इसके लिए मैं हमारीवाणी से जुड़े सभी लोगों का शुक्रिया अदा करता हूँ. चलिए इसी बहाने रवीन्द्र प्रभात जी को २०१२ मैं अमन का पैग़ाम शीर्ष  १०० ब्लॉग मैं अवश्य दिखाई दे जाएगा. 

 

आज कल अच्छे लेख या कविता लिख के पाठकों को आकर्षित करने का चलन नहीं रहा , आज  या तो चाटुकार बन जाओ  या फिर बेवजह विवाद खड़ा कर दो ,लोगों को भी कुछ चटपटा मिल जाता है , और सोये हुए ब्लॉग मैं भी जान आ जाती है. बदनाम हुए भी तो क्या नाम ना होगा वाली बात यहाँ सत्य दिखाई देती है. यह और बात है की झगडे  खड़े कर के ज़िंदगी पाने वाला म्रत सामान हुआ करता है.

स म मासूम

Monday, February 14, 2011

यह सांस्कृतिक संक्रमण क़ा समय है वैलेंटाइन डे special

[happyvalentines4.jpg]मैंने एक पोस्ट डाली थी वैलेंटाइन डे और प्यार के नाम पे अनैतिक सम्बन्ध, जिसमें मैंने दो सवाल उठाए थे. १.वैलेंटाइन डे को मनाना और दूसरा शादी की सही उम्र.आज वैलेंटाइन  डे के अवसर पे मैं उन ब्लोगेर्स की टिप्पणिओं को एक साथ पेश कर रहा हूँ .

इन  टिप्पणिओं को पढने के बाद भारतीय समाज मैं वैलेंटाइन डे की क्या जगह है यह बात साफ समझमें आ जाती है. मूल लेख और पूरी टिप्पणिओं को पढने के लिए यहाँ जाएं..

 

  • यह सांस्कृतिक संक्रमण क़ा समय है यह सांस्कृतिक संक्रमण क़ा समय है जिसमे सही गलत एक दूसरे से गुत्थमगुत्था हो गए है...DR. PAWAN K MISHRA
  • हमारे द्वारा किया अपने बच्चों का मार्गदर्शन ही समाज और फिर देश को एक संस्कारी युवावर्ग दे सकता है ...Minakshi पन्त
  • पश्चिमी सभ्यता को अपनाकर अपनी संस्कृति को भूले जा रहे हैं । हर कार्य की एक उपयुक्त आयु होती है । सेक्स भी उनमे से एक है ।..डॉ टी एस दराल
  • वैलेंटाइन , लिविंग रिलेशनशिप और मस्तिष्क के स्वस्थ विकास के पूर्व शारीरिक संबंध ... पाश्चात्य सभ्यता की नक़ल नहीं तो और क्या है ! ....रश्मि प्रभा...
  • .इसमें गलती हमारे युवा वर्ग की कम हमारी ज्यादा है क्योंकि हमने उन्हें संस्कार ही नहीं दिए। ...वीना
  • वैलेंटाइन डे के पीछे जितना हम लोग पागल हुये हे, उतना तो यह पश्चिम वाले भी नही पागल हुये हे,...राज भाटिय़ा
  • मेरी समझ से जब तक आज के युवाओं को मनोवैज्ञानिक स्‍तर पर नहीं ट्रीट किया जाता, इस वातावरण से मुक्ति पाना असम्‍भव है।..ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
  • हम वैलंटाइन दे क्यों दोष दें?यह तो सिर्फ एक दिन मनाया जाता है लेकिन क्या इसके बिना हमारे यहाँ इस तरह के काम नहीं होते हैं..रेखा श्रीवास्तव
  • अपने से छोटों को यौन शिक्षा दीजिये, जिससे उन्हें पता हो की उन्हें सम्बन्ध किस उम्र में बनाने हैं, क्योंकि कई बार तो जिज्ञासा के कारण लोग ये कदम उठा बैठते हैं... जिन घरों में ये शिक्षा मिली है, कहीं लड़कियों को माता से, लड़कों को पिता से या फ़िर बड़े भई-बहन से.... वहां के बच्चे नहीं बिगड़ते..POOJA...
  • ज़माना बहुत बदल गया है दोस्तो(बूढ़ों का पुराना सदा बहार डायलॉग है यह). जब से दुनिया बनी है युवा यही करते आए हैं और करते रहेंगे....जो रोक सके रोक ले..भूषण
  • ज़माना तहक़ीक़ का बेशक है लेकिन ऐसे में लोग पश्चिम की दूषित बाज़ार वाद से ग्रसित घिनौनी संस्कृति (?) को अपनाने में हिचक नहीं महसूस करते है..सलीम ख़ान

मैं अपने सभी ब्लोगर साथियों का शुक्रिया अदा करता हूँ जिन्होंने अपने विचार इमानदारी से प्रकट किए.

Tuesday, February 8, 2011

सामाजिक समस्याओं का हल मिल जुल कर सहायता करें (समस्या विवाह की सही उम्र)

नमस्कार साथियों 
मैंने अपने वैलेंटाइन डे के लेख मैं युवाओं की समस्या पे लिखा और मैं उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करता हूँ जिन्होंने लेख को पढ़ा और अपने विवहार प्रकट किये. अधिकतर लोगों ने वैलेंटाइन डे से सहमती और असहमति पे तो अपने विचार प्रकट किए लेकिन बहुत कम लोगों ने विवाह की सही उम्र के बारे मैं बात की और इस समस्या का समाधान दिया की  ….
problem “वो सेक्स की इच्छा जो १३-१५ साल से ही युवा महसूस करना शुरू  कर  देता है हमारे शादी की सही उम्र १८-२७ या ३५ कर देने से ख़त्म हो जाएगी? 


यदि नहीं तो क्या यह आशा करना के हमारा युवा १० से २० वर्ष (शादी होने तक) इस इच्छा को दबा के रखेगा और अच्छे   और संस्कार देने के भाषण देना क्या हकीकत से आंखें मोड़ना नहीं है?


क्या ऐसा नहीं लगता की हम सेक्स की सही उम्र की हकीकत से आँखें मोड़ के अपने युवाओं को शादी से पहले नाजायज शारीरिक संबध बनाने के लिए मजबूर करते हैं और इसका इलज़ाम भी उन्ही युवाओं पे रखते हैं

अपने इस लेख को २ दिन का और समय दे रहा हूँ, इस आशा के साथ की कोई और ब्लोगेर इस समस्या का समाधान पेश शायद कर जाए..
अपने इस लेख के ज़रिये मैंने यह कोशिश की है की नारेबाजी से हट कर सामाजिक समस्याओं का हल मिल जुल कर निकला जाए. आशा है आप सभी का सहयोग मिलेगा. अगली पोस्ट मैं काबिल ए ज़िक्र टिप्पणी के साथ इस समस्या के समाधान को पेश किया जाएगा. यदि किसी पाठक  को इस समस्या का कोई हल दिखता हो तो अवश्य बताएं और सामाजिक समस्याओं का हल मिल जुल के निकालने की कोशिश करें.
पूरा लेख पढ़ें और अपने विचार यहाँ प्रकट करें .
आभार 
स.म.मासूम

Sunday, February 6, 2011

रज़िया मिर्ज़ा का आदाब ..रज़िया राज़

पेश ए खिदमत है रज़िया राज़ जी की  कविता
ओ इन्सान को बाँटनेवालो, क़ुदरत को तो बाँट के देख़ो।
ओ भगवान को बाँटनेवालो, क़ुदरत को तो बाँट के देख़ो।
कोइ कहे रंग लाल है मेरा, कोइ कहे हरियाला मेरा।
रंग से ज़ुदा हुए तुम कैसे ओ रंगों को बाँटनेवालो? ओ इन्सान को..


अमन के पैग़ाम पे अभी तक  अमन के पैग़ाम" पे सितारों की तरह चमकें" श्रेणी मैं ४६ से अधिक ब्लोगेर्स के लेख और कविताएँ पेश की जा चुकी हैं. अमन के पैग़ाम के लेख को अर्चना जी ने अपनी आवाज़ दी और कुछ लेखों को अमर बना दिया. यह ब्लॉगजगत मैं एक नया तजुर्बा है और पहली बार इस काम को अमन के पैग़ाम ब्लॉग ने अंजाम दिया.


लेखों को अर्चना जी की आवाज़ के साथ मैंने विडियो की शक्ल देने की कोशिश की है जो आप के सामने पेश होती रही है. रज़िया राज़ जी का यह लेख और कविता इस श्रेणी की पहली पेशकश रही है जिसको ३१ टिप्पणिया मिली.


कल से अमन के पैग़ाम पे पेश किये  गए  लेख और कविताओं  का विश्लेषण उनको   मिली टिप्पणी  के साथ पेश किया जाएगा..
आज पेश है रज़िया राज़ जी के लेख का विडियो