Why I love Islam: Lauren Booth defiantly explains why she is becoming a Muslim
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BayaN ho jayega sub kuch zaban-e bezabaanee se, Bus itni shart' hai pal bhar ko tou bhi bezabaN ho ja. Jawaid
Sunday, October 31, 2010
Thursday, October 28, 2010
वोह विडियो जो इंसानियत का और शांति भाईचारे का पैग़ाम देते हैं
इस सप्ताह के वोह विडियो जो इंसानियत का और शांति भाईचारे का पैग़ाम देते हैं, अवश्य सुनें.
आप से अनुरोध है की इस पोस्ट पे आके अपने विचार प्रकट करें.
Sheeesh “The Mirror”
Wednesday, October 27, 2010
Tuesday, October 26, 2010
Thursday, October 21, 2010
Look at the gray point at the middle of picture then move your head to the front and back .it seems the circle are swing.
Look at the gray point at the middle of picture then move your head to the front and back .it seems the circle are swing.
बोलना ज़रूरी नहीं . No need to speak
बोलना ज़रूरी नहीं. आप सब भी अपने विचार प्रकट करें, इस तस्वीर को देख के जो भी आपने दिन मैं ख्याल आता है.
Friday, October 15, 2010
जनाब हसन असग़र हुसैनी एक देशभक्त हिन्दुस्तानी.
Monday, October 11, 2010
अमन का पैग़ाम …..
अमन का पैग़ाम …..
- फ्रांस में बुर्के पर प्रतिबंध ज़िम्मेदार कौन?
- सौ काम खुशामद से निकलते हैं जहाँ में:अल्लामा इकबाल
- जो भी चीज़ अपनी सीमा को नहीं पहचानती उसे कष्ट पहुंचता है
- इस्लाम को बदनाम करने कि एक विश्वव्यापी साजिश
- विश्व स्तरीय बुधिजीविओं के विचार ,पैग़म्बर ए इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.अ.w),के बारे मैं.
- शुक्रिया शुक्रिया शुक्रिया
- एक सार्थक लघु फिल्म "अमन का पैगाम"
- अयोध्या फैसला सही भी और गलत भी
- मुर्ग़ी का अण्डा चुराने वाला एक दिन सोने का अंडा चुराता है.
- १० गुनाहगार छूट जाएं लेकिन किसी एक बेगुनाह को सजा ना हो।
क़ुरआन रब की ख़ास इनायत का नाम है।
क़ुराने मजीद
क़ुरआन रब की ख़ास इनायत का नाम है।
क़ुरआन नज़मो ज़बते शरीयत का नाम है।
क़ुरआन एक ज़िंदा हक़ीक़त का नाम है।
क़ुरआन ज़िंदगी की ज़रूरत का नाम है।
क़ुरआन एक किताबे इलाही जहाँ में है।
क़ुरआन के बग़ैर तबाही जहाँ में है।
- क़ुरआन किरदगार की रहमत का नाम है।
क़ुरआन ज़ुल जलाल की अज़मत का नाम है।
क़ुरआन अहलेबैते रिसालत का नाम है।
क़ुरआन ही तो मक़सदे बेसत का नाम है।
नाज़िल किया है इसको ख़ुदा-ए- जलील ने ।
पहुँचाया है रसूल तलक जिबरईल ने।
- क़ुरआन अंबिया की कहानी का नाम है।
क़ुरआन ला मकां की निशानी का नाम है।
क़ुरआन दीने हक़ की रवानी का नाम है।
क़ुरआन मुस्तफ़ा की जवानी का नाम है।
क़ुरआं के इल्म की नही हद, बेपनाह है।
क़ुरआन एक किताब नही, दर्सगाह है।
- क़ुरआन है नबी की नबूव्वत को मोजज़ा।
क़ुरआन है रमूज़ की कसरत को मोजज़ा।
क़ुरआन है ख़ुदा की सदाक़त को मोजज़ा।
क़ुरआन आज भी है बलाग़त का मोजज़ा।
ऐसी कोई किताब नही कायनात में।
क़ुरआन का जवाब नही कायनात में।
- ताज़ीम इस किताब की हक़ के वली ने की।
काबे में सबसे पहले नबी के वसी ने की।
क़ब्ल अज़ नुज़ूल इसकी तिलावत अली ने की।
तसदीक़ इस कलाम की मेरे नबी ने की।
क़ुरआनो अहलेबैत का ये इत्तेसाल है।
क़ुरआन हो अली के बिना ये मुहाल है।
- है ज़िक्र नूह का, कहीं आदम का तज़किरा।
ईसा का ज़िक्र है, कहीं मरियम का तज़किरा।
है जा बजा रसूले मुकर्रम का तज़किरा।
और है कहीं पे ख़िलक़ते आलम का तज़किरा।
हिजरत का तज़किरा, कहीं ज़िक्रे ग़दीर है।
है ज़िक्रे फ़ातिमा, कहीं ज़िक्रे अमीर है।
- क़ुरआन को गिरोह में बट कर न देखिये।
लफ़ज़ो मआनी इसके उलट कर न देखिये।
औराक़ इसके सिर्फ़ पलट कर न देखिये।
कुरआं को अहले बैत से हट कर न देखिये।
क़ुरआन दीने हक़ की ज़रूरत का नाम है।
क़ुरआन अहलेबैत की सीरत का नाम है।
Sunday, October 10, 2010
फ्रांस और बुर्का
एक विडियो देखा जिसमें खुली टांगों के साथ बुर्का पहन के फ्रांस की कुछ औरतों ने बुर्के का मज़ाक उड़ाया. चलिए इनको तो नहीं मालूम शर्म ओ हया क्या होती है लेकिन इन तस्वीरों ने मेरे दिल मैं कई सवाल पैदा कर दिए.
क्या आज का मुसलमान इस्लाम का मज़ाक ऐसी ही नहीं उडाता?
जब कोई औरत खुद को मुसलमान भी कहती है और बेहिजाब भी रहती है.
जब कोई मर्द या औरत नमाज़ भी पढता है, और हराम की कमाई की फ़िक्र मैं भी रहता है.
ऐसी बहुत सी मिसालें मोजूद हैं.
कहीं यह तस्वीर आज के मुसलमान की तो नहीं?
कुरआन मैं ज़िक्र है: इंसानों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि हम अल्लाह और क़ियामत पर ईमान ले आये हैं, परन्तु वह मोमिन नहीं हैं।(मुनाफ़िक़ यह समझते हैं कि) वह अल्लाह व मोमिनों को धोका दे रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि वह स्वयं को धोका देते हैं, लेकिन वह इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं।
इस्लाम को कभी भी कोई खतरा उनसे नहीं रहा जो इस्लाम को नहीं मानते , बल्कि हमेशा इस्लाम को नुकसान पहुँचाया है दो चेहरे (मुनाफ़िक़) वाले मुसलमानों ने, जो खुद को मुसलमान भी कहते हैं और हुक्म ए खुदा के खिलाफ चलते भी हैं.
Saturday, October 9, 2010
केवल दो से तीन घंटे तक पैदल चल के बचें फ़ालिज के खतरे से
आज कल हम इतने अपनी ज़िन्दगी की भाग दौड़ मैं, पैदल तो चलना ही भूल गए हैं. जिसके तरह तरह के नुकसान हमको होते रहते हैं. मधु मेह, ब्लेड प्रेशर , मोटापा जैसी बिमारिओं का इलाज पैदल चलना है यह हम जानते हैं. नए शोध के अनुसार अब आप सप्ताह में केवल दो से तीन घंटे तक पैदल चल के अपने आप को फ़ालिज के खतरे से बचा सकते हैं. पैदल चलने को स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक बताया जा रहा है हारवर्ड विश्वविद्यालय में होने वाले अध्ययन के अनुसार तेज़ चलने से फालिज के ख़तरे से बचा जा सकता है और एक अध्ययन के अनुसार विशेषज्ञों का कहना है कि तेज़ चलने वालों में फालिज का ख़तरा ३७ प्रतिशत तक कम हो जाता है। अध्ययन में पता लगता है कि पैदल चलने से दिल की बीमारियों के ख़तरे भी काफी सीमा तक कम हो जाते हैं।
सौ काम खुशामद से निकलते हैं जहाँ में:अल्लामा इकबाल
जो भी चीज़ अपनी सीमा को नहीं पहचानती उसे कष्ट पहुंचता है
Friday, October 8, 2010
हिजाब और शैतान
Shaitan The Way The Devil Works ( Hijab)
इस्लाम को बदनाम करने कि एक विश्वव्यापी साजिश
महिलाओं की स्वतंत्रता और मुल्ला का फतवा
Friday, October 1, 2010
मकई की रोटी और हृदय संबंधी रोग
मकई जहां टाइम पास के एक साधन के रूप में प्रख्यात है वहीं इसके औषधीय गुण भी हैं। ताज़ा शोध में पता चला है कि मकई कैंसर और हृदय संबंधी रोग के ख़तरे को कम कर देती है। अमरीका में होने वाले इस शोध के अनुसार मकई स्वास्थ्य के लिए एक बहुत अच्छा आहार है क्योंकि इसमें पॉलिफ़ेनल्ज़ नामक विशेष प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कैंसर, दिल की बीमारियों और दूसरे बहुत से रोगों से मनुष्य को सुरक्षित रखता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मकई शरीर में हानिकारक वसा को भी कम करती है जबकि इसमें पाया जाने वाला विटामिन बी शरीर की शक्ति को संतुलित रखता है।
कॉर्न यानी मकई की रोटी भारत के उत्तरी इलाकों में सबसे ज्यादा खाई जाती है । मकई का आटा कोलोन कैंसर के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । इसके आटे से तैयार रोटी में कई न्यूट्रीशंस-विटामिन बी 1, बी5, विटामिन सी, फास्फोरस और मैगनीज होता है । साथ ही, ये बीटा कैरोटीन यानी विटामिन-ए से भरपूर होता है , इसी वजह से मकई का रंग पीला होता है । इसमें मौजूद फाइबर हृदय विकारों और फोलेट एसिड नवजात की शारीरिक विकृतियों को रोकने के साथ ही होमोसाइस्टीन के स्तर को भी कम करता है





